अयोध्या धामधर्म

राष्ट्रीय सनातन हिन्दू धर्म के ऐतिहासिक विरासत की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है : लक्ष्मी खंडेलवाल 

राष्ट्रीय सनातन हिन्दू धर्म के ऐतिहासिक विरासत की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है : लक्ष्मी खंडेलवाल
अयोध्या धाम
विद्वानो ने भारतीय इतिहास मे उलटफेर कर गड़बड़िया पैदा की है ये सत्य है लेकिन साथ साथ ये भी हमेंl सोचना होगा की, बिद्वानो आचार्य और पीएचडी वालो की भूल , किसी भी रुचिकर डिग्री धारी इतिहास के लेखक की नासमझी, लालच, स्वार्थ ने भी इतिहास का कबाड़ा किया है,  कोई बोले या ना बोले, लेकिन ईमानदार निष्पक्ष भाव से प्राचीन धार्मिक इतिहास भूगोल के खोजकर्ता
    भारतीय इतिहास की सच्चाई  किसने कब उलटफेर कर धार्मिक इतिहास मे गड़बड़िया की है, उनका नाम इतिहास मे नही लिखा है लेकिन इतिहास की किताबें, पुराण अपना दुःख प्रगट कर खोजकर्ताओ से बोल रहे है, जो लाखो विद्वानो मे किसी को ही सुनाई देता है, यानि प्राचीन काल से चला आ रहा जिवंत इतिहास आज भी बोलता है जिसके प्रणाम मेरे पास है, क्यों की उनकी सूक्ष्म आवाज हमें सुनाई देती है तभी खोजकर्ता शोध संशोधन द्वारा सुधार सकते है  ये प्राचीन इतिहास से रूबरू होने पर आप गहराई से अध्यन करोंगे तो ही पता लगेगा, खोज रहित इतिहास कहता है की हमें सुधारो, भारत सरकार को इसलिए बात की ओर ध्यान देना चाहिए, भारत के सभी धार्मिक संस्थानों का प्राचीन धार्मिक इतिहास को सुधारने मे कोई इंट्रेस्ट नही है गलत रट्टा ज्ञान चलाते है, बाते विद्वात्ता की करते है, वंशावली इतिहास का कार्य शून्य से फिर सर्जन करना पड़ता है जो उनके दिमाग के बाहर की बात है भले वो भारत के कितने भी बड़े कथाकार क्यों नही है, तर्क की कसौटी पर वें कहा खडे है ये तो उनके सवाल जवाब से आपको पता लग जायेगा, की ये कितने बड़े  इतिहास के विद्वान् आचार्य है  मेरी इसलिए बात को समझें गलत ना ले क्यों की सत्य बात तो कहना ही पड़ेगा, अगर कार्य आजादी के बाद अपने अपने सम्प्रदाय के ट्रस्ट मंदिर वालों ने करोडो अरबो रूपया अपने बेंको मे जमा किया है लेकिन भगवान श्री रामजी और भगवान श्री कृष्ण के वंशावली के अलावा भी तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव, महावीर स्वामी के  खोज रहित वंशावली इतिहास के कार्य आज तक हजारों वर्षो से आधे अधूरे पड़े है, भले ना आप अरब पति होंगे, लेकिन आपकी ऐतिहासिक विरासत का आईना आपकी खोज रहित जानकारी की विद्वत्ता को दर्शाता है, की  जिन शासन के इतिहास मे अंधेरा तो है ही सनातन हिन्दू धर्म इतिहास को भी ध्यान देना चाहिए, की इतिहास मे गड़बड़िया निकालना जरुरी है या नही, इस बात पर भारत सरकार को भी ध्यान देना होगा, अगर आपके डिग्री धारी विद्वानो आचार्यो की समझ मे नही आता है तो, काम करने का मेहनताना तो देना ही पड़ेगा, सरकार ने आपके संसाधनों हेतु अरबो रुपियो की सुविधा के साथ लाख रुपये पगार भी देती है, और हम आपसे भी ज्यादा मेहनत कर रहे है, इस पर चिंतन करना जरुरी है, सभी प्राचीन भगवान जी के इतिहास का यही हाल है, बस इनको हाथ जोड़ो, हजूरी करो और मर जाओ, और इतिहास की सच्चाई किसके भरोसे ? ये साधु और ट्रस्ट के ठेकेदार बावजी के आदेशानुसार, करोडो मे  ऐश कर खर्चा कर रहे है आप सब देख रहे है और भगवान के पूर्वजो और वंशजो के सच्चे इतिहास की वंशावली इतिहास की सच्चाई किसके भरोसे ?  अब आप ही बताये अगर 500 सो करोड़ का मंदिर खर्च है तो मूल भगवान रामजी हो या कृष्णजी आपकी कदर तो ईश्वर के पीछे है, और भगवानजी का इतिहास गड़बड़ी वाला चलाना आपको सही लगता है, ये चिंता और चिंतन का विषय है, पर ऐसा मोदीजी जै राज मै नही चलेगा, क्यों की भगवान का इतिहास आपके भरोसे है लेकिन गड़बड़ी बिल्कुल नही चलेगी, इस बात पर आपको ध्यान रखना आपकी जिम्मेदारी है, खोज रहित गलत इतिहास नही चलेगा,  क्यों की मैं इतिहास का जानकार खोजकर्ता हूँ  कोई आपके सामने बोले या ना बोले मै इतिहास की सच्चाई  को जानता हूँ इसलिए राष्ट्रीय सनातन हिन्दू धर्म के ऐतिहासिक विरासत की रक्षा करना हमारा कर्तव्य भी है, क्यों की आप हर काम रूपया देकर करवा रहे है, जो संसार की व्यवस्था का नियम है, इसलिए मेहनत की बात करना भी जायज है जैसा काम वैसा भुगतान करना भी पड़ता है  क्यों की काम कितना जटिल गुत्तीभरा और कितना पुराना है भगवान कृष्ण भी कर्म योग मै कहते है कर्म फल ही जीवन चक्र का हिस्सा है, बाकि आप लोग भी समझदार है, ये कड़वा सच है अन्य संस्थानों के पास ईमानदार, निष्पक्ष, बुद्धिमान नही है  इसलिए भगवान जी के इतिहास के सभी संस्थानों मै कार्य आधे अधूरे पड़े है, काम खोजकर्ता करें और क़ीमत आप तय करें, ये न्याय पूर्ण बात नही है क्यों की इतिहास की शास्त्र प्रमाणित तथ्यों का सत्य जो इतिहास का  तत्कालीन संदर्भ में घटीत हुआ, जिसका मिलान आपको इतिहास की सच्चाई बताने हेतु  खोजकर्ता ने वर्षो की मेहनत से प्रमाणित सुधार किया है जो सनातन सत्यधर्म की बात से सम्मत है जो विश्व भारत जै आपके जिज्ञासु मन का मार्गदर्शन करेगा, क्या आप इतिहास की सच्चाई से रूबरू होना चाहते है तो आप खोजकर्ता से एकबार रूबरू मिलिए, ताकि आपकी आँखे खुल जाएगी और दिलो दिमाग से फ़ालतू खोज रहित ज्ञान की भ्रान्तियो का अज्ञान रूपया कचरा या मिथ्या रट्टा ज्ञान मे सुधार हो जायेगा, सनातन राष्ट्र धर्म संस्कृति सभ्यता के हित में  भारत के प्राचीन इतिहास की जटिल गुत्तियों पर 25 वर्षो की कठोर मेहनत से खोजकर्ता ने हजारों किताबें और पुराण पढ़ने के बाद मै अपना प्रेक्टिकल अनुभव लिखा है, आपका मेरे निजी ग्रंथालय, 9833081119 सिरोही, राजस्थान में स्वागत है, मेरा प्रयास आपका कार्य एक कदम सफलता की ओर ले जाना है, जो आपके पद की गरिमा को और देश को आगे बढ़ाये, ताकि आपके कार्यकाल का विश्व भारत मे गौरव बढे, आपकी डिग्रियां भी सत्य को देखकर आप पर हसेगी की हमने ऐसा खोजकार्य क्यों नही किया, क्यों की हमारी सोच से बाहर था, आपने सरकार और ट्रस्ट के माध्यम से करोडो रूपया खर्च किया है, लेकिन भारत का प्राचीन धार्मिक सनातन हिन्दू धर्म का इतिहास अंधेरे मे है, मेरी बाते सुनकर आपका दिल दिमाग़  आपको क्या कहेगा, आपके लिए ये चिंता और चिंतन का विषय है, भारत में प्रचलित पुराण इतिहास का वो सत्य जो आपके दिमागी रेडॉर से बाहर है इसलिए आप प्राचीन धार्मिक इतिहास की सच्चाई से रूबरू ना होकर भर्मित होकर आज  हजारों वर्षो आजादी जै बाद भी सच्चे इतिहासकार खोजकर्ता की तलाश मे भटक रहे है, इसलिए भगवान ने खुद सत्य को आपके सामने भेजा है, अब शास्त्र प्रमाणित सत्य को स्वीकार करना हमारा कर्तव्य भी है,  आपने दुनिया देखि है लेकिन मेरे बारे में कही नही सुना होगा, अगर आप विश्व भारत के इतिहास से अंधेरा दूर करना चाहते है, तो एक बार खोजकर्ता से आप जरूर संपर्क करें, क़ीमत जो मैं चाहु, काम जो भारत का प्राचीन काल से खोज रहित इतिहास मांग रहा है, क्यों की भारत मेरा, आपका, हम सबका देश  है , क्यों की काम बहुत मुश्किल है, अगर आसान होता तो  आज तक पड़ा नही रहता, कोई भी विद्वान् आचार्य या पीएचडी वाला भी कर लेते, लेकिन ऐसा नही हुआ है और मुझे लिखना भी नही पड़ता, सो झूठ बोलने से अच्छा है एक बार कड़वा सच बोलो, बहुत से लोग कहते है आप किताब छाप दो लेकिन मेरा मानना है, डुप्लीकेट करने वाले चोर और रायल्टी के नाम मीठा बोलकर ठगने वालों का मार्किट भरा पड़ा है मेरे पूर्वज इतिहासकार गरीब बन लाचारी हजूरी से आज भी जी रहे है और किताबें बेचने वाले अरबो पति बन गए है ये भारत के इतिहासकारों की सच्ची कहानी है अगर वें सरकारी नौकरी नही करते तो वें आज किस हालत में होते,? ये मेरे विद्वान् मित्रो का कहना है और  आप में से बहुत भुगत भी रहे है, हम इतिहासकार भुगत भोगी है, अब तो इतिहास के क्षेत्र में क्रांति करूँगा और सच्चाई दुनिया के सामने लाऊंगा, तभी भारत को पता लगेगा की सच्चाई भगवान श्री रामजी के इतिहास की सच्चाई ये कहती है जो आपके द्वारा दुनिया के सामने आएगी, और ट्रस्ट भी अपनी जिम्मेदारी पर गर्व महसूस करेगा, की उनका वंशावली इतिहास गड़बड़ियों से भरा पड़ा था / है हमारे पुराणो में विधर्मी विद्वानो ने सनातन हिन्दू धर्म संस्कृति को नीचा दिखाने हेतु, कितना हेरफेर किया है उसका अंदाजा आपको भी नही है, ये आपके किए कार्य द्वारा ही विश्व को भारत का सन्देश जायेगा, ये अनुभवी इतिहासकार ही बता सकते है वर्तमान मे प्राचीन इतिहास की जटिल गुत्तियों को सुधारना और शोध संशोधन करना उनके दिमाग़ से बाहर का विषय हो गया है  क्यों की कार्य चार युगो से खोज रहित चला आ रहा है तो आप बताये क्या किया इन इतिहास के पीएचडी वालों ने सरकारी पगार लेकर, सवाल तो भारत करेगा ही, की शिक्षा के नाम अरबो रूपया सरकार खर्च कर चुकी है, तो मेरा इतिहास के जटिल विषय पर काम की क़ीमत मांगना, इतिहास कार्य का क्रन्तिकारी कदम होगा,  विदेशी विद्वानो से सिख मिलती है की, नो रायल्टी, समय की क़ीमत रोकड़ी होती है, इसलिए विदेशी लोग हमारे से बहुत आगे चल रहे है, मोबाइल शुरू करते ही एक महीने का पूरा रूपया पहले ले लेते है फिर फूटे कर्म आपके, टीवी पर समाचार सही है या गलत पहले रुपया बिज्ञापन का, बाद में काम, अतः  हम इतिहासकारों को भी सही तरीके से व्यवस्था बनाकर कार्य निष्पक्ष ईमानदारी से कार्य करना होगा, भारत सरकार जो शिक्षा के नाम पर अरबो रूपया खर्च करती आ रही है और विश्व भारत इतिहास के अंधेरे में ही चक्र मार कर तिकडम बाजी करता आ रहा है जिसे हमें सुधारना आवश्यक है, क्यूबकी हमें आज भी खोज रहित इतिहास पढ़ाया रहा है ये देश और समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बात है,  जैसा हमें आज तक रट्टा सिखाते चले आ रहे है या सिखाया जा रहा है, की भरत से इस देश का नाम “भारत”  पड़ा, और हम मानते आ रहे है क्या ये सच है या खोज रहित ? लेकिन इस  सवाल का उत्तर ही प्रमाण के साथ खोज निकाला है है  विश्व भारत के प्रथम खोजकर्ता बंसी नारायण खंडेलवाल सिरोही राजस्थान से है, आप कहेँगे बताओ तो खोजकर्ता ने जो 25 वर्षो से मेहनत किया आर्थिक नुकसान किया, वो समय जो मुझे दुबारा नही मिलेगा, आप तो सरकारी पगार लेकर ऐश कर रहे थे और मैं आर्थिक दृष्टी से गरीबी के दलदल में डूबता जा रहा था, मेरे परिवार के हालात कैसे रहे होंगे, इसलिए पहले आपको ये सोचना पड़ेगा, की काम की कितनी होनी चाहिए ?  और देगा कौन ? ये कौन तय करेगा की इसे माने या ना माने, सारा काम आमने सामने सवाल जवाब पहले उतर तब मिलेगा सवाल की सच्चाई का उत्तर, जब क़ीमत एग्रीमेंट के साथ पक्की तय होने पर बैंक मे पे की जाये, क्योकि ज़माना ठगाई का है, खोजकार्य की कीमत कौन तय करेगा ? मेहनत करने वाला या पद पर कार्य कर रहे नौकर या मालिक जो कार्य को खरीद रहा है या बिचोलिये दलाल या प्रकाशक ? ये मैं इसलिए कह रहा हूँ की इतिहास विषय का पूरा मार्किट ही बिगाड़कर रखा है जिसे शोषण मुक्त करना मेरा कर्तव्य होगा, क्यों की मैं प्रथम बार, भारत के प्राचीन धार्मिक इतिहास की  ऐसी खोज भारत के ऐतिहासिक पटल पर लाने वाला विश्व भारत का पहला खोजकर्ता इतिहासकार  हूँ ऐसे कार्य वो ही कर सकता है जिस पर ईश्वर और गुरुदेवो की प्रबल कृपा दृष्टी हो,  वरना चार युगो में कितने आए कितने चले गए, ये सनातन सत्य बात है, जिस तरह हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी मोदीजी ने भारत की राजनीति में क्रांति लाई है ठीक वैसे ही मै एक खोजकर्ता होने के नाते इतिहास में क्रन्तिकारी जागृति लाना चाहता हूँ  ताकि डिग्रीधारी, विद्वान् और आचार्य भी अपने विश्व विद्द्यालय और गुरुकुल में इतिहास की सच्चाई पर कुछ अच्छा और नया करने का साहस करें, और उन्हें उनकी मेहनत का मेहनताना पूरा मिले, ताकि भारत के इतिहास की सच्चाई का सही ज्ञान प्राप्त हो और इतिहासकार को उसका सही मेहनताना  प्राप्त हो, और इन फोगट में मीठा बोलकर ठगने वाले चालाक व्यक्तियों की दुकान बंद हो जाये, और खोजकर्ता लेखक को इन्साफ मिले, और  सम्मान होना ठीक है लेकिन वो सम्मान किस काम का, प्रमाण पत्र मेडल मात्र से, साफा नारेल के मोह माया के चक्र में और आप फेमस हो जायेंगे इत्यादि शब्दों की मीठी वाणी से ठगने वाले चतुर दलालो के आश्वासन से परिवार का पेट नही भरता है, काम करने वाले हर इंसान के अपने सपने होते है,  वो कैसे पुरे होंगे, किताब लिखने वाला गरीब और बेचने वाला कुछ दिनों मे ही मालामाल हो  जाता है, ये इतिहासकारो के पर्दे के पीछे का सच है, अब हमें जागना और जगाना होगा, ताकि उन इतिहासकारो की आत्मा को शांति मिले, जो विद्वान् होते हुए भी गरीबी में शोषण का शिकार होकर मज़बूरी मे ही मर गए, मगर किसी ना किसी को भगवान ईमानदारी से अच्छे कार्य करने हेतु  भेजता है |
विद्वान् इतिहासकारों की बीती सच्ची बात को किसी ने दिल पर लेकर राष्ट्रीय भावना से समर्पित होकर, भारत के उज्ज्वल भविष्य हेतु खोजकर्ता ने सिस्टम को बदलने के कार्य की पहल की है,  और भगवान श्री कृष्ण जी की बात मजबूत होवे इसलिए कर्म योग के सिद्धांत को कर्म करेगा तो फल मिलेगा की  बात को आत्सात कर विश्वास कर कार्य की शुरुआत भगवान श्री रामजी  की ऐतिहासिक लेखनी से की है जो सत्य की कसौटी पर खरा और ऐतिहासिक वंशावली इतिहास का कार्य पूर्ण हो चुका है, जो इतिहास जा मूल आधार स्तम्भ होता है, जो भारतीय खोजकर्ता ने किया है हरी करें सो खरी, इतिहासकार खोजकर्ता को उसकी आर्थिक नुकसान और जीवन के खोये हुए अमूल्य समय की सही क़ीमत मिलेगी, इसी सद्भावना और अमर आशा के  साथ  अब हमें फालतू बातो पर भरोसा नही, काम की कीमत का मेहनताना लेने पर भरोसा करना है की काम कितना जटिल और प्राचीन है जिसे चार युगो में  भगवान वेद व्यासजी के बाद कोई नही कर पाया है वो कार्य कलयुग मे खोजकर्ता ने करके दिखाया है जैसा काम वैसी क़ीमत, इतिहास की जटिल गुत्तियों के समाधान का उत्तर शास्त्र प्रमाण के साथ है, जो ना गूगल पे ना राजघराने के पास ना ही डिग्री धारी इतिहासकार की किताबों में शास्त्र सम्मत प्रमाण के साथ मिलेगा, सत्यमेव जयते, भावार्थ ये कहता है की ईमानदारी से भारत के प्राचीन धार्मिक इतिहास विषय पर शोध संशोधन और खोज कार्य करने की क़ीमत हम विद्वान्  खोजकर्ता झवेरी तय करेंगे, प्रकाशक या दलाल नही, तभी इतिहासकार भारत के इतिहास पर सच्चाई से लिखने का कर्म करेंगे और जटिल विषयो पर खोज करने का साहस करेंगे, वरना गोदी मिडिया लेखकों से आपको इतिहास मिलेगा, भटकते रहो, और भारत मे के धर्म संस्कृति मे गड़बड़ीया करते रहो, क्यों की इतिहास युगो युगो तक बोलता है, ध्यान नही रखा तो देश का धीरे धीरे पतन हो जायेगा, और इतिहास की प्राचीन गुत्तियों को सुधारने मे ही जीवन पूरा हो जायेगा, जैसे मैंने पूरी जिंदगी दाव पर लगा दी थी, ईश्वर बड़ा दयालु है उन्हें कोटि कोटि नमन करता है, उसने मुझे शक्ति प्रदान की और सक्षम बनाया और सकारात्मक सोच के साथ जिज्ञासु भावना पैदा की, ताकि मै अपने लक्ष्य तक पहुंच पाया हूँ, आप समझे चार युगो के,  हजारों वर्षो बाद  इतिहास की सच्चाई की खोजने वाला प्रथम खोजकर्ता  ईश्वर की कृपा से  उतर देने वाला संपूर्ण विश्व भारत का एक व्यक्ति खोजकर्ता है जिसे ईश्वर ने सलेक्ट किया है, यह सोचकर की मेरे भारत और सनातन धर्म के भगवान का कार्य ईमानदारी से कौन करेगा,?  आपको इतिहास का शास्त्र प्रमाणित सत्य रेडिमेंट कार्य किसी भी एक किताब मै कही नही मिलेगा, ये मेरा वर्षो का अनुभव 5000 हजार किताबें पढने के बाद का प्रेक्टिकल अनुभव बोल रहा है, इसलिए विद्वानो की सत्य की कसौटी पर तर्कपूर्ण खोज काम करने की क़ीमत क्या होनी चाहिए ? ये देश के जिम्मेदार पदों पर बैठे विद्वानो को सोचना पड़ेगा , तभी भारत का भविष्य उज्जवल होगा, वरना जय सियाराम की…, अब लेखकों की मज़बूरी का फायदा उठाने वालों की मनमानी नही चलेगी, ताकि उनका शोषण ना हो, परिवर्तन संसार का नियम है, क्यों की ईमानदारी और सत्यता हमें यही सिखाती है, आओ मिलकर राष्ट्र समाज हित में कार्य करने का प्रयास करें, तभी सबका साथ सबका विकास होगा, यही मोदीजी का नया भारत हमें सिखाता है, जो हम सबको प्रेरणा देता है और सच्चे इतिहास को प्राप्त करने का सच्चा ऐतिहासिक ज्ञान होता है, इस बात को हमें नही भूलना चाहिए और ना भूले, प्राचीन धार्मिक इतिहास भूगोल के खोजकर्ता – बंसी नारायण खंडेलवाल
 राजस्थान, जय हिन्द  जय जय सियाराम

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