उत्तर प्रदेशलखनऊ

क्षत्रिय समाज को हमेशा धोखा दिया गया है : डॉ मुरलीधर सिंह “शास्त्री” अधिवक्ता उच्च न्यायालय

क्षत्रिय समाज को हमेशा धोखा दिया गया है : डॉ मुरलीधर सिंह “शास्त्री” अधिवक्ता उच्च न्यायालय
लखनऊ
 क्षत्रियों के कर्म का निर्धारण भगवान श्री कृष्ण ने गीता के दूसरे अध्याय के 28 श्लोक से दिया है आज सभी लोग क्षत्रियों को गाली दे रहे हैं |
 केवल क्षत्रिय समाज का ही इतिहास है
 और किसी का नहीं अपने इतिहास की ओर लौटे अपने आप को समझे  आपका ग्रंथ महाभारत है श्रीमद् भागवत है रामायण है
 और 18 पुराणों में से 10 पुराणों में आपका विशेष उल्लेख है |
80% मठ क्षत्रियों द्वारा बनाए गए हैं 10% मठ वैश्य समाज द्वारा बनवाए गए हैं तथा 10% शेष मठ अन्य जातियों द्वारा बनाए गए
केंद्रीय राज्य सरकार अपने एजेंसी से इसकी जांच कर सकती है |
मेरे पास इसके ठोस प्रमाण है
 अपने गौरव की ओर लौटे
 डॉक्टर मुरलीधर सिंह शास्त्री अधिवक्ता
 मा उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ
 लखनऊ से
26 दिसंबर 2025
वह अपने आप के बारे में सोच अपने समाज के बारे में सोचें दूसरे के समाज के बारे में क्यों सोचते हैं  धर्म रक्षा करना है
और समाज को जोड़ना इस श्रीमद् भागवत में रामायण में शास्त्रों में उल्लेख
 शिवि दाधीच हरिश्चंद्र नरेशl
 धर्म हेतु  तन सहेयू कलेशl
क्षत्रिय हमेशा छला गया,ठाकुर हमेशा ठगा ही गया….इच्छावाकु  वंश से लेकर आज तक आप इतिहास लिखने जाएंगे तो क्षत्रियों से बड़ा प्रजापालक दानवीर शायद ही आपको मिले राजा हरिश्चंद्र से राजा शिवि भागीरथ से लेकर श्री राम तक जिन्होंने अपनी कभी सीमा विस्तार में रूचि नहीं ली उन्होंने सुग्रीव के लिए युद्ध लड़ा पर उसकी राज्य की सीमा में प्रवेश नहीं किया दशानन रावण की पूरी लंका जीती लेकिन राज्य विभीषण को दिया वह तो अवध में ही खुश थे श्री राम ने सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया वह शायद ही कोई दूसरा राजा देता है केवट कोल भील निषाद यहां तक की पक्षियों से भी अपार स्नेह किया फिर वो शंबुक की कहानी पीछे लगाकर उनके पूरे त्याग तपस्या और मर्यादित आचरण को धूमिल करने का प्रयास किया गया….
नमो बुद्धाय बुद्ध भी उसी वंश की वंशावली हैं सत्य अहिंसा में राज्य छोड़ दिया,जैनियों के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी भी इच्छावाकु वंश से ही थे, त्याग समर्पण प्रजा वत्सला की ये एक परंपरा है जो युगों युगों से चली आ रही है लेकिन ‌कालांतर में ये सब भुलाया जाने लागा रानी पद्मावती जिन्होंने हजारों रानियों के साथ जौहर किया आज उनके वंशज इस राजनीति में कहां हैं राणा प्रताप ने इसी देश के लिए घास की रोटियां खाई और स्वाभिमान से समझौता नहीं किया आज उनके वंशज राजनीति में कहां है स्व प्रधानमंत्री श्री वी पी सिंह जी ने अपना पूरा जीवन शोषितों और दलितों के लिए दिया अपनी राजनीतिक पारी की बलि दे दी मंडल आयोग को लागू करने में विनोबा के आंदोलन में अपनी‌ जमीन दान‌ दे दी उनके वंशज आज राजनीति में कहां है,स्वर्गीय चंद्रशेखर ने कभी जातीय राजनीति नहीं की संसद में या सड़क पर केवल सोशित वंचितों का मुद्दा उठाया पिछड़े वर्ग के लिए शिक्षा में आरक्षण देने वाले पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री  और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व श्री अर्जुन सिंह के वंशज आज राजनीति में कंहा है इतनी रियासतें हैं इतने खेत बारी सब दान देना इतना त्याग बलिदान इस कौम ने किया और वह राजनीतिक हांसिए पर हैं…
उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनीति भी अगर आप देखें तो योगी जी को बाकायदा क्षत्रिय चेहरा करके प्रोजेक्ट किया जाता रहा है हालांकि उनका मूल संत का रहा है वह‌ एक पीठाधीश्वर भी हैं कुल परंपरा से क्षत्रिय हैं तो उनके मुकाबिल हमेशा किसी उनके दल के ही पिछड़े नेताओं को तरजीह देने की बात होती है हालांकि राजनैतिक कद के अनुसार योगी जी के बराबर वो सब कहीं नहीं ठहरते अपने ही विधानसभा सीट हारने वाले लोग अपने ही क्षेत्र की लोकसभा सीटें हारने वाले नेता उनको केवल जातीय आधार पर तरजीह दिया जाना‌ ये आज नहीं तो कल‌ हो भी जाएगा आखिर क्षत्रिय करें तो क्या करें,इचछावाकु वंश के हरिश्चंद्र श्री राम  बुद्ध  ऋषभदेव जी महाराज भगवान महावीर जी योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण जी से लेकर महराणा प्रताप पद्मिनी स्वर्गीय बीपी सिंह स्वर्गीय चंद्रशेखर स्वर्गीय अर्जुन सिंह से लेकर आज योगी जी तक डगने और छलने का खेल जारी है आप कभी लिस्ट बनाये की और दूसरे जात के नेताओं महापुरुषों ने अपनी जाती के अलावा दूसरे जातियों को कितनी तरजीह दी है… प्योर धार्मिक क्षेत्र में 80% मठ क्षत्रियों द्वारा बनाए गए हैं शेष 10% मठ 22 वैश्य समाज द्वारा बनाए गए हैं और शेष 10% मठ अन्य जातियों द्वारा बनाए गए हैं आज देखें समाज को गाली देने से नहीं भला होने वाला है छत्तीसगढ़ क्षत्रियों ने जो त्याग किया है कोई धरती पर आर्यावर्त में कोई त्याग नहीं किया |
जय हिंद जय भारत जय सनातन धर्म जय क्षत्रिय समाज

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