अयोध्या धामउत्तर प्रदेशजयंती
आचार्य श्रीरामानंदाचार्य जी ने अध्यात्म को लोकजीवन से जोड़कर उसे जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया

आचार्य श्रीरामानंदाचार्य जी ने अध्यात्म को लोकजीवन से जोड़कर उसे जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया
अयोध्या धाम
भारतीय भक्ति परंपरा के युगप्रवर्तक आचार्य श्रीरामानंदाचार्य जी ने अध्यात्म को लोकजीवन से जोड़कर उसे जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने निर्भीक भाव से यह प्रतिपादित किया कि भक्ति किसी जाति या वर्ग की बपौती नहीं, अपितु प्रत्येक श्रद्धालु हृदय का सहज अधिकार है।लोकभाषा के माध्यम से रामभक्ति का प्रसार कर उन्होंने साधना को साधारण जन तक पहुँचाया। कबीर, रैदास, सेन और पीपा जैसे विविध सामाजिक पृष्ठभूमि से आए शिष्यों को स्वीकार कर उन्होंने सामाजिक समरसता का अनुपम आदर्श स्थापित किया।
रामो विग्रहवान् धर्मः
करुणा यस्य जीवितम्।
लोकमंगलरतो नित्यं
तं वन्दे पुरुषोत्तमम्॥
श्रीरामानन्दगुरवे
नमो निर्भयभक्तये।
समरसत्वप्रदात्रे
लोकमंगलहेतवे॥
रामनामप्रकाशकाय,
निर्भयभक्तिप्रवर्तकाय,
समरससमाजप्रतिष्ठापकाय
जगद्गुरवे श्रीरामानन्दाचार्याय नमः।।

श्रीरामानंदाचार्य जी के लिए राम केवल उपास्य देव नहीं थे, बल्कि मर्यादा, करुणा और लोकमंगल के शाश्वत प्रतीक थे। उनकी भक्ति जीवन से पलायन नहीं सिखाती, बल्कि कर्तव्यबोध, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ने की प्रेरणा देती है। आज उनकी जयंती पर यह स्मरण अत्यंत प्रासंगिक है कि निर्भय भक्ति और समरस समाज का जो मार्ग उन्होंने प्रशस्त किया, वह आज भी उतना ही जीवंत और आवश्यक है।। जगतगुरु स्वामी श्री रामानंदाचार्य जी महाराज की जयंती की अनेकानेक बधाईयां शुभकामनाएं मंगलकामनाएं आपको
श्रीरामानंदाचार्य जी को कोटिशः नमन।।




