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मुख्यमंत्री योगी जी महाराज के राजसिंहासन का पुनरुद्धार: सम्राट अशोक जैसी आभा के साथ ‘देवदार’ के आसन पर विराजेंगे 

मुख्यमंत्री योगी जी महाराज के राजसिंहासन का पुनरुद्धार: सम्राट अशोक जैसी आभा के साथ ‘देवदार’ के आसन पर विराजेंगे
लखनऊ/उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ओजस्वी व्यक्तित्व में अब एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। जिस प्रकार प्राचीन काल में चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान के सिंहासन की गर्जना पूरे आर्यावर्त में गूँजती थी, कुछ वैसी ही भव्यता अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आसन में दिखाई देगी। मुख्यमंत्री योगी अब देवभूमि की पवित्र लकड़ियों से निर्मित ‘सिंह-आसन’ पर सुशोभित होंगे।
1. केदारनाथ की पवित्रता और देवदार की सुगंध
इस विशिष्ट कुर्सी (सिंहासन) की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण सामग्री है। इसे केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट के दौरान बची हुई दुर्लभ देवदार की लकड़ियों से तैयार किया गया है। शास्त्रों में देवदार को देवताओं का वृक्ष माना गया है। इस लकड़ी की प्राकृतिक विशेषता यह है कि इससे एक निरंतर मंद-मंद सुगंध प्रवाहित होती रहती है, जो पूरे वातावरण को शुद्ध और आध्यात्मिक बनाए रखेगी।
2. शिल्पकारी में झलकता ‘सम्राट अशोक’ का गौरव
इस सिंहासन को साधारण कुर्सी कहना इसकी कला का अपमान होगा। इसकी बनावट में सम्राट अशोक के काल की भव्यता और उत्तराखंड की समृद्ध मंदिर वास्तुकला का मिश्रण है:
 *सिंहों की आकृति:* कुर्सी के हत्थों पर नक्काशीदार शेरों (सिंहों) की आकृतियां बनाई गई हैं, जो शक्ति, न्याय और सुशासन का प्रतीक हैं।
 *मंदिर शैली की नक्काशी:* इस पर की गई बारीक नक्काशी उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों की याद दिलाती है, जो सनातन संस्कृति की जड़ों को मजबूती से दर्शाती है।
3. कर्नल कोठियाल की विशेष भेंट
इस दिव्य आसन को उत्तराखंड सरकार के राज्यमंत्री (रिटायर्ड कर्नल) अजय कोठियाल ने विशेष रूप से तैयार करवाया है। उन्होंने इसे शौर्य और सेवा के संगम के रूप में मुख्यमंत्री को समर्पित किया है।
4. मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त
अध्यात्म और राजनीति के इस मिलन के लिए 15 जनवरी (मकर संक्रांति) का पावन दिन चुना गया। गोरखपुर प्रवास के दौरान योगी आदित्यनाथ को यह सिंहासन सौंपा गया। सूर्य के उत्तरायण होने के शुभ अवसर पर इस भेंट को स्वीकार करना, उत्तर प्रदेश के आगामी स्वर्ण युग और सशक्त नेतृत्व का संकेत माना जा रहा है।
 यह केवल बैठने का स्थान मात्र नहीं है, बल्कि यह देवभूमि की श्रद्धा और सम्राट अशोक जैसी न्यायप्रियता के संकल्प का प्रतीक है। जब मुख्यमंत्री इस ‘सिंह-आसन’ पर विराजेंगे, तो वह दृश्य निश्चित रूप से प्राचीन भारतीय गौरव की याद दिलाएगा।

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