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अयोध्या में स्वास्थ्य मेले के दावों पर उठे सवाल, व्यवस्था पर मरीजों ने जताई नाराज़गी

अयोध्या में स्वास्थ्य मेले के दावों पर उठे सवाल, व्यवस्था पर मरीजों ने जताई नाराज़गी
अयोध्या
 शहर के अवध इंटरनेशनल स्कूल में श्री गोरखनाथ पीठ न्यास और नेशनल मेडिकोज़ ऑर्गेनाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे आयोजन आमजन के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकते हैं।आयोजकों की ओर से दावा किया गया कि मेले में प्रदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भागीदारी की। इनमें संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और कल्याण सिंह कैंसर संस्थान के चिकित्सकों की सहभागिता बताई गई। मेले में सामान्य स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप और शुगर परीक्षण के साथ दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया गया। साथ ही नेत्र रोगियों के लिए मुफ्त चश्मा वितरण और मोतियाबिंद ऑपरेशन की व्यवस्था का भी दावा किया गया।
हालांकि मेले के दौरान कई मरीजों ने व्यवस्थाओं को लेकर नाराज़गी जताई। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ा और जांच की प्रक्रिया धीमी रही। मौके पर मौजूद मरीज आरती मिश्रा ने आरोप लगाया कि मेले में केवल “पहुंच वाले” लोगों की जांच प्राथमिकता से की जा रही थी, जबकि आम और गरीब मरीजों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही थी। उन्होंने बताया कि वह करीब दो घंटे तक नेत्र जांच और चश्मा वितरण के लिए प्रतीक्षा करती रहीं, लेकिन अंततः उनकी जांच नहीं हो सकी।
धरातल पर पड़ताल करने पर यह भी सामने आया कि जिन बड़े संस्थानों के विशेषज्ञों की मौजूदगी का दावा किया गया था, उनके प्रतिनिधि तक स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिए। कई पटल पर होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सक बैठे नजर आए, जबकि एलोपैथिक विशेषज्ञों की संख्या सीमित दिखी। इससे आयोजकों के बड़े दावों पर सवाल खड़े हो गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य मेले का उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन व्यवस्थागत कमियों के कारण जरूरतमंदों को आशा के अनुरूप लाभ नहीं मिल सका। कुछ मरीजों ने पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही।हालांकि आयोजकों की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य मेले जैसे आयोजनों से आमजन को राहत मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन यदि व्यवस्थाएं पारदर्शी न हों तो ऐसे प्रयासों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है|

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