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पौराणिक कथा के अनुसार आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है : डॉ मुरलीधर सिंह अधिवक्ता उच्च न्यायालय

पौराणिक कथा के अनुसार आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है : डॉ मुरलीधर सिंह अधिवक्ता उच्च न्यायालय
अयोध्या धाम
आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भोलेनाथ मां पार्वती का गौना कराकर लाए थे। इसी के कारण रंगभरी एकादशी के दिन गुलाल की होली खेली जाती है। विशेषकर काशी में इस पर्व को होली की तरह धूमधाम से मनाया जाता है।
दूसरी बात -मान्यता है कि आमलकी एकादशी के दिन ही आंवले के पेड़ का प्राकट्य हुआ था. इस दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है. इसलिए भक्त इस दिन पेड़ की पूजा करते हैं और आंवले का फल भगवान को अर्पित करते हैं. कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को वरदान दिया था कि आंवला उन्हें अत्यंत प्रिय होगा।
यह आमला वृक्ष (फाइलेन्थस एम्ब्लिका) का उत्सव है, जिसे भारतीय आंवला के नाम से भी जाना जाता है । ऐसा माना जाता है कि श्रीहरि विष्णु जी इसके देवता है। जिनके लिए एकादशी पवित्र मानी जाती है, और इस वृक्ष में निवास करते हैं। देवता की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन आंवला वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा की जाती है।
सन 2026 में अमलकी एकादशी 27 फरवरी, शुक्रवार के दिन मनाई जा रही है। यह व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आता है। शास्त्रों में इसे अत्यंत पुण्यदायी और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी कहा गया है।
अमलकी का अर्थ है आँवला – जिसे आयुर्वेद में अमृतफल कहा गया है। यह केवल एक फल नहीं, बल्कि भगवान विष्णु का प्रतीक माना गया है। इस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा करने से जीवन में आरोग्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
📖 पौराणिक कथा का सार
पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार एक समय में चित्ररथ नामक राजा ने इस व्रत का पालन अत्यंत श्रद्धा से किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें राज्य, सुख और अंत में मोक्ष प्रदान किया।
इस कथा का संदेश है — श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत जीवन के कठिन कर्मबंधनों को भी शिथिल कर देता है।
व्रत विधि (सरल और प्रभावी)
1. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
2. भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
3. आँवले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं।
4. रोली, अक्षत, जल और फूल अर्पित करें।
5. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।
6. फलाहार या निर्जल व्रत रखें (स्वास्थ्य अनुसार)।
7. द्वादशी को ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देकर व्रत पूर्ण करें।
मेरे ज्योतिषीय अनुभव से – 2026 की विशेष ऊर्जा
27 फरवरी 2026 के दिन ग्रह स्थिति अत्यंत सूक्ष्म आध्यात्मिक कंपन दे रही है। मेरे वर्षों के ज्योतिष अनुभव में मैंने पाया है कि जब एकादशी शुक्रवार को आती है, तो यह लक्ष्मी-नारायण योग का संकेत देती है।
मेरे पास आने वाले कई साधकों की कुंडली में जब गुरु या शुक्र पीड़ित होते हैं, तो मैं उन्हें अमलकी एकादशी का व्रत रखने की सलाह देती हूँ। विशेषकर:
जिनकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो
विवाह में विलंब हो
संतान प्राप्ति में बाधा हो
स्वास्थ्य बार-बार बिगड़ता हो
ऐसे लोगों को इस व्रत से अद्भुत लाभ मिलता है।
एक मेरे क्लाइंट (नाम गोपनीय) की कुंडली में गुरु अष्टम भाव में नीच स्थिति में थे। लगातार आर्थिक रुकावटें थीं। मैंने उन्हें तीन अमलकी एकादशी नियमपूर्वक करने का उपाय बताया। आश्चर्यजनक रूप से चौथे महीने उन्हें नई नौकरी और आर्थिक स्थिरता मिली।
विशेष ज्योतिषीय उपाय (2026 के लिए)
1️⃣ गुरु बलवर्धन उपाय
आँवले के वृक्ष पर हल्दी मिश्रित जल चढ़ाएँ।
पीली वस्तु का दान करें।
2️⃣ विवाह बाधा निवारण
आँवले के नीचे बैठकर 11 माला “ॐ नमो नारायणाय” का जप करें।
3️⃣ आर्थिक वृद्धि हेतु
आँवले का 5 फल भगवान विष्णु को अर्पित कर तिजोरी में एक फल रखें (सूखा हुआ)।
4️⃣ पितृ दोष शांति
आँवले के वृक्ष की परिक्रमा 11 बार करें और कच्चा दूध अर्पित करें।
आध्यात्मिक दृष्टि से अमलकी एकादशी
आँवला हमारे आज्ञा चक्र और मणिपुर चक्र को संतुलित करता है। यह व्रत केवल बाहरी पूजा नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि की प्रक्रिया है।
जब हम एकादशी का उपवास करते हैं, तो शरीर में विषैले तत्व कम होते हैं, मन शांत होता है और निर्णय शक्ति प्रबल होती है। यही कारण है कि ऋषि-मुनि एकादशी को मन और आत्मा की डिटॉक्स तिथि कहते थे।
2026 में यह व्रत किनके लिए अनिवार्य जैसा है?
जिनकी दशा में गुरु, शुक्र या चंद्र प्रभावित हों
राहु-केतु की महादशा चल रही हो
बार-बार मानसिक तनाव हो
परिवार में अशांति हो
अंतिम संदेश – मेरे हृदय से
वर्षों की साधना, शोध और हजारों कुंडलियों के अध्ययन के बाद मैं एक बात पूर्ण विश्वास से कह सकती हूँ —
एकादशी केवल व्रत नहीं, यह कर्म शुद्धि का द्वार है।
यदि नियम, श्रद्धा और संयम से अमलकी एकादशी की जाए, तो यह जीवन की दिशा बदल सकती है।




