अयोध्याउत्तर प्रदेश
सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए: राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पाण्डेय

सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के दुकानदारों के
पुनर्वास की व्यवस्था की जाए: राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष पाण्डेय
अयोध्या
सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के दुकानदारों
और प्रशासन के मध्य हुई वार्ता विफल
प्रशासन की ओर से मिला महज कोरा आश्वासन |
हिंदू महासभा ने जताया आक्रोश कहा की दुकानदारों की पुनर्वास की व्यवस्था
अयोध्या सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के परिसर में स्थित दुकानदारों और प्रशासन के मध्य हुई वार्ता एक बार फिर से विफल रही, दुकानदारों से वार्ता के लिए पहुंचे नगर मजिस्ट्रेट संजीव कुमार उपाध्याय द्वारा कहा गया कि भविष्य में अगर कहीं पर दुकान उपलब्ध होती हैं तो पहली वरीयता आप लोगों को दी जाएगी, नगर मजिस्ट्रेट द्वारा यह भी कहा गया कि सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के प्रबंध तंत्र और दुकानदारों के मध्य हुए समझौते में 4 साल ही बचे हैं, 4 साल बाद वैसे भी दुकानदारों को कानूनी रूप से दुकान को खाली करना होगा, इस पर दुकानदारों की ओर से कहा गया कि वर्ष 2000 में पगड़ी के रूप में ₹80000 सीतापुर नेत्र चिकित्सालय रिफंड में दिया गया था इसी के साथ-साथ प्रत्येक मावे किराया भी देते हैं दुकान 30 साल के लिए लीज एग्रीमेंट पर दी गई थी और 30 वर्ष पश्चात उसका रीन्यूअल करने की बात भी कही गई थी किंतु अब प्रशासन अपनी शर्तों से पीछे हट रहा है, पूर्व के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा और बिना पुनर्वास के आश्वासन के ही सबको बलपूर्वक बाहर करने का पहले ही नोटिस थमा चुका है |

वही हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पांडे ने कहा कि उनके द्वारा प्रारंभ से ही दुकानदारों के पक्ष में संघर्ष किया जा रहा है, इस संबंध में उनके द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को पत्र भेज कर संपूर्ण दस्तावेज संलग्न कर स्थिति से अवगत कराया गया था किंतु शासन की ओर से भी इस विषय में कोई भी गंभीर प्रयास नहीं किए गए, वही श्री पांडेय द्वारा जन सूचना के अंतर्गत प्रशासन से मांगी गई रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से वर्णन है कि दुकानदारों के पुनर्वास हेतु प्रयास किया जा रहा है जिससे दुकानदारों को अन्य कहीं यथा संभव समायोजित किया जा सके किंतु दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से प्रशासन दुकानदारों को कहीं भी समायोजित करने के प्रति गंभीर नहीं है, वहीं दुकानदारों की मांग है कि चिकित्सालय परिसर में ही कुछ दुकान बनवाकर दुकानदारों को आवंटित की जाएं क्योंकि चिकित्सालय परिसर में जगह की कमी नहीं है, दुकान द्वारा द्वारा यह भी कहना है कि प्रशासन द्वारा अलग-अलग स्थान पर 20 से 25 लाख की दुकान दिखाई गई किंतु वे दुकान उनके लिए निष्प्रयोज्य हैं, क्योंकि वह इतनी भारी कीमत देने की ना तो स्थिति में है, दूसरे जो दुकान दिखलाई जा रही हैं वहां पर उनका धंधा चौपट ही होगा वह चल नहीं सकता |




