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संतवाणी का अनुसरण करते हुए अंधविश्वास से बचा जा सकता है : लक्ष्मीकांत जोशी

 संतवाणी का अनुसरण करते हुए अंधविश्वास से बचा जा सकता है : लक्ष्मीकांत जोशी
अयोध्या धाम
महाराष्ट्र से आए धर्मप्रसारक लक्ष्मीकांत जोशी ने अयोध्या में विशेष बातचीत के दौरान धर्म, अध्यात्म और आचरण के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोगों के मन में भक्ति, अध्यात्म और भगवान को लेकर कई प्रश्न उठते रहते हैं, लेकिन इनका समाधान संतों की वाणी और शास्त्रों के अध्ययन से संभव है।
लक्ष्मीकांत जोशी ने स्पष्ट कहा कि “धर्मप्रसारक जैसा कहें, वैसा आचरण करना ही सच्चा धर्म है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि केवल सुनना ही नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारना ही वास्तविक साधना है। उनके अनुसार, जब व्यक्ति संतवाणी का अनुसरण करता है, तो वह अंधविश्वास से दूर रहकर सही मार्ग पर चल सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन व्यक्ति को ईश्वर के प्रति गहरा लगाव प्रदान करता है। विशेष रूप से रामचरितमानस के अध्ययन को उन्होंने जीवन को धन्य बनाने वाला बताया। उनका मानना है कि इस ग्रंथ में जीवन जीने की सरल और सार्थक दिशा मिलती है।
जोशी ने कहा कि भक्ति क्या है, अध्यात्म क्या है और भगवान कौन हैं — ये ऐसे प्रश्न हैं जो हर व्यक्ति के मन में उठते हैं। इन सवालों के उत्तर पाने के लिए व्यक्ति को सत्संग, संतों के मार्गदर्शन और ग्रंथों के अध्ययन की आवश्यकता होती है।
अंत में उन्होंने संदेश दिया कि यदि समाज संतों की वाणी और सही आचरण को अपनाए, तो न केवल अंधविश्वास समाप्त होगा बल्कि एक स्वस्थ और जागरूक समाज का निर्माण भी संभव हो सकेगा।

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