अयोध्याउत्तर प्रदेश
हिन्दी दैनिक जनमोर्चा का 68वां स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया

हिन्दी दैनिक जनमोर्चा का 68वां स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया
अयोध्या
आज के दौर में मीडिया ने जनवादी चेतना को खत्म कर दिया है। जनता की चेतना खत्म करने की शुरुआत हिटलर के समय जर्मनी में मीडिया के माध्यम से उसके सचिव गोयबल्स ने शुरु की थी। भारत में आज वही दौर आ गया है जब मीडिया जनता की चेतना को खत्म कर रहा है।
उक्त विचार शुक्रवार को हिन्दी दैनिक जनमोर्चा के 68वें स्थापना दिवस समारोह में वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया प्राध्यापक व लेखक रामशरण जोशी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रेस क्लब फैजाबाद में व्यक्त किये।
श्री जोशी ने कहा कि लोकतन्त्र संविधान व मीडिया तीनों एक साथ चलते हैं। अगर देश में लोकतन्त्र नहीं रह जायेगा तो संविधान और मीडिया का वजूद खत्म हो जायेगा। आज के समय में तमाम अखबारों की हेडिंग तय की जा रही है कि क्या छपेगा ?

उन्होंने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री से यह शिकायत रहेगी कि उन्होंने सामन्तवादियों को राजनीति में आने दिया। इसकी वजह से सामन्तवादी परिस्थितियां आज भी जीवित हैं। श्री जोशी ने कहा कि देश में अजीब दौर चल रहा है मौजूदा प्रधानमंत्री ने देश पर 11 वर्ष के शासन में एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं की। उन्होंने कहा कि आज के चैनल और प्रेस में यह ताकत नहीं है कि वह प्रधानमंत्री की आंख में आंख डालकर सवाल पूछ सकें।
श्री जोशी ने कहा कि अब समय आ गया है कि तीसरी आजादी की लड़ाई की शुरुआत की जाये। कहा कि मौजूदा सरकार वन नेशन वन इलेक्शन से देश मेंं तानाशाही लाने की फिराक में है। मौजूदा सरकार विपक्ष मुक्त भारत, विपक्ष मुक्त संसद व विपक्ष मुक्त विधानसभा चाहती है जो केवल राजशाही, तानाशाही और सामन्तशाही के दौर में होता था।

स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार , मीडिया विश्लेषक उर्मिलेश ने कहा कि संविधान, लोकतन्त्र और मीडिया यह ऐसा विषय है, जिसमें भारत की हर समस्या समाहित है। उन्होंने कहा कि दुनिया के तमाम देश ऐसे हैं जहां संविधान नहीं है फिर भी मजबूत लोकतन्त्र है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा का समाजवादियों और वामपंथियों ने विरोध किया था। वह संविधान सभा में होत तो कुछ नया संविधान में जुड़ा होता।
उन्होंने कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर ने संविधान की शक्तियों के गलत हाथों में जाने के प्रति पहले ही आगाह कर दिया था। कहा कि मौजूदा सत्ता की नीतियों का वही विरोध कर सकता जो एकदम संत हो और उस पर कोई आरोप न लगा हो। उन्होंने कहा कि आज के दौर में विपक्ष में डा. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण के स्तर का कोई नेता नहीं है जिस पर जनता विश्वास कर सके कि यह हमारी समस्याओं के लिए सत्ता से टकरा सकता है। उन्होंने कहा कि खत्म होते लोकतन्त्र को विपक्ष का वही नेता बचा सकता है जो स्वभाव से संत की विचारधारा का हो। उन्होंने कहा कि गीता को धार्मिक ग्रन्थ कहा जाता है लेकिन सही अर्थों में वह राजनीतिक है उसमें वर्ण व्यवस्था की वकालत की गयी है।

वरिष्ठ पत्रकार व लेखक आशुतोष ने ‘समर शेष हैÓ कविता से अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के समय में देश के महानायकों महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरु पर हमला एक लोकतान्त्रिक सोच को खत्म करने की साजिश के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात करती हैं उनको पता होना चाहिए कि जब तक संविधान है तब तक उनका मंसूबा पूरा नहीं होगा। कहा कि देश आजाद हुआ तो महात्मा गांधी, डा. जवाहरलाल नेहरु, भीमराव अंबेडकर ने सबको साथ लेकर चलने का प्रयास किया उससे ही देश आज तक एकजुट है। उन्होंने कहा कि हिन्दू राष्ट्र केवल संविधान की लाश पर बन सकता है जो कि संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान सबको नागरिक मानता है किसी के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करता।
उन्होंने कहा कि 2014 में देश में सत्ता का ही नहीं विचारधारा का भी हस्तांतरण हो गया था। मनमोहन सिंह की सरकार ने नब्बे हजार घुसपैठियों को बाहर भेजा था यह सरकार केवल घुसपैठियों के नाम पर राजनीति कर रही है।
साहित्यकार चन्द्रेश्वर ने कहा कि हमारा समाज कहां से कहां पहुंच गया। आजादी के समय जब हमारा संविधान बना तो मूल्यों को लेकर बना था आज के दौर में मूल्य टूट रहे हैं। मोटर साइकिलों पर जाति लिखकर चलने का दौर शुरु हो गया है। कुछ लोग तो अपने नाम के आगे गोत्र भी लिखकर चल रहे हैं। यह खतरनाक शुरुआत है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया न होता तो हम तमाम पत्रकारों और बड़े विद्वानों के विचारों को नहीं सुन पाते।

वरिष्ठ पत्रकार रामकुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि सहकारिता के आधार पर प्रकाशित जनमोर्चा के स्तंभ रहे महात्मा हरगोविन्द, शीतला सिंह, बलभद्र प्रसाद गुप्ता के संघर्ष को हम नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि सत्य पर आधारित खबरों के साथ जनमोर्चा आज भी लोगों के मध्य मौजूद है।
वरिष्ठ पत्रकार वीएन दास ने कहा कि मौजूदा समय में लोकतन्त्र पर हमला हो रहा है। पूर्व विधायक जयशंकर पाण्डेय ने कहा कि हम लोग महात्मा गांधी, डा. राममनोहर लोहिया से पे्ररित होकर राजनीति में आये। पत्रकार व अधिवक्ता जेपी तिवारी ने कहा कि एक समय भ्रष्टाचार करने वाले जनमोर्चा की खबर से डरते थे।
आलोचक रघुवंशमणि ने कहा कि पत्रकारिता का लक्ष्य पहले लोगो को सही समाचार देना था। आज की पत्रकारिता का लक्ष्य धन कमाना रह गया है।
वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने कहा कि लोकतन्त्र ने जिनको बनाया उन्होंने पद पाते ही लोकतन्त्र के विरुद्ध काम करना शुरु कर दिया। आज देश में मजबूत सरकार नहीं मजबूत नागरिक की आवश्यकता है।
वरिष्ठ पत्रकार इन्दुभूषण पाण्डेय ने कहा कि संविधान की अर्थी पर लोकतन्त्र का जनाजा मीडिया उठाए जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार त्रियुग नारायण तिवारी ने स्थापना दिवस पर जनमोर्चा परिवार को बधाई दी।
स्थापना दिवस समारोह का संचालन जनमोर्चा की संपादक डा. सुमन गुप्ता ने किया। अतिथियों का स्वागत स्थानीय संपादक रामकुमार सिंह, हरिकृष्ण अरोड़ा, जयप्रकाश सिंह, सूर्यनारायण सिंह, सुरेश यादव आदि ने किया।
इस मौके पर बदेरू यादव, रमजान अली, वंशराज सिंह, रामआशीष तिवारी, उग्रप्रताप सिंह को सम्मानित किया गया।
समारोह में बीकापुर की पूर्व विधायक शोभा सिंह चौहान, विधायक प्रतिनिधि सूर्य प्रसाद श्रीवास्तव, सहकारी बैंक चेयर मैंन धर्मेन्द्र प्रताप सिंह टिल्लू, रालोद प्रदेश उपाध्यक्ष विश्वेषनाथ मिश्र सुड्डू, महंत जनमेजय शरण, महंत धर्मदास, महंत विजय रामदास, सपा नेता पंडित समरजीत, सरोज यादव, पूजा वर्मा, हरिप्रसाद दूबे, स्वप्निल श्रीवास्त्व, रामानंद सागर, आरडी आनंद, मण्डलीय अभियंता बृजेश सिंह, घनश्याम वर्मा, तिलकराज तिवारी, सुनीता पाण्डेय, देवबख्श वर्मा, सुनील सिंह, मनोज महरोत्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व जनमोर्चा परिवार के सदस्य मौजूद रहे ।




