लखनऊ
सरकार को नजूल अधिनियम बनाकर शहरी जमीनों को विनियमित करना चाहिए : डॉ मुरलीधर सिंह “अधिवक्ता उच्च न्यायालय”

सरकार को नजूल अधिनियम बनाकर शहरी जमीनों को विनियमित करना चाहिए : डॉ मुरलीधर सिंह “अधिवक्ता उच्च न्यायालय”
लखनऊ
उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 एक नजर में
सरकार को नजूल अधिनियम बनाकर शहरी जमीनों को विनियमित करना चाहिए
शासन स्तर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी होनी चाहिए
मैं इसका उदाहरण लखनऊ जनपद एवं अयोध्या जनपद का दे रहा हूं
डॉ मुरलीधर सिंह
अधिवक्ता
मा उच्च न्यायालय
लखनऊ पीठ
लखनऊ 20 दिसंबर 2025
उत्तर प्रदेश में शहरी विकास को भी नियमित करने के लिए इस अधिनियम की घोषणा 1973 में हुई थी और तब से प्रदेश में विकास प्राधिकरण एवं विशेष आवासीय क्षेत्र का प्रचलन हुआ
इसमें समय-समय पर संशोधन हुए इसमें 2023तक संशोधन हुए हैं तथा इसके संचालन के लिए नियमावली 1997 में बनाई गई है तथा विकास प्राधिकरण अपराधों का समन अप विधि 2009 में बनाया गया है
कोई भी अधिनियम स्वतंत्र नहीं होता है उसके क्रियान्वयन के लिए संबंधित निकाय के साथ-साथ अन्य निकायों का समन्वय जरूरी है
जैसे इस अधिनियम के सफलतापूर्वक अनुपालन के लिए नगर निगम प्रशासन जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की गहन समन्वय की आवश्यकता है
समय पर सरकार समय-समय पर सरकारों द्वारा आवासीय क्षेत्र के हम शहरों के विस्तार के लिए शहर के अन्य क्षेत्रों को जो नगर निगम में शामिल किया जाता है
तथा जो नगर निगम में शामिल किए जाते हैं वह स्वाभाविक बात विकास प्राधिकरण में आ जाते हैं ऐसा
दो जनपदों का विशेष रूप से उदाहरण दूंगा
एक जनपद स्वयं लखनऊ है
और दूसरा जनपद अयोध्या दोनों जनपदों में पड़ोसी जनपदों के अनेक भागों को गांव को शामिल किया गया नगर निगम द्वारा लेकिन प्राधिकरण द्वारा वहां के कार्यों में जैसे नक्शा बनाना निर्माण करना आदि में कार्रवाई की जाने लगी की दोनों जनपदों में विभाग पर व्यापक उदाहरण मौजूद है
और इसका विधिक दृष्टि से
मेरे द्वारा समस्या विश्लेषण भी जरूरी है
तथा सरकार को जो लोकप्रिय सरकारें होती हैं जनहित कारी होती हैं
उसको ध्यान देना चाहिए इस अधिनियम के में जहां कमजोर वर्ग के व्यक्तियों को पुनर्वास देने और आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है
वहीं प्राधिकरण क्षेत्र में घटित जमीन संबंधी या नक्शा संबंधी बातों के विवादों के निस्तारण की भी व्यवस्था की गई है
इस अधिनियम अधिनियम की पूर्ण रूप से 60 धाराएं हैं
इसमें मुख्य रूप से हम 26 और 27 धाराओं का उल्लेख करेंगे
जो जनता से विशेष संबंध रखते हैं तथा जनता जनता धारा नंबर 26 धारा जहां प्राधिकरण को घोषित नगर निगम क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति देता है
वही धारा 27 निर्माण के कार्यों को विनियमित करण करने की कार्रवाई करती है
इसमें मुख्य कारवाइयां दो होती हैं या तो बाद को शुल्क के साथ समन कर दिया जाता है
या ध्वस्तिकरण की कार्रवाई होती है
मेरा मानना है कि सरकार द्वारा इसकी की समीक्षा की जानी चाहिए लेकिन इसकी गहनता पूर्वक और उदारता पूर्वक भी समीक्षा होनी चाहिए
जो की कल्याणकारी दृष्टि से आम जनमानस के सुविधाकारी हो
और इसके लिए जन अदालत भी लगाया जाना चाहिए
दूसरा पक्ष नगर निगम क्षेत्र में जब तक नगर निगम के विकास के कार्य नहीं होते हैं
या वहां से इलेक्टेड सभासद सीटों के निधि का उपयोग नहीं होता है तब
तक वहां हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए
इसे लोगों में समस्या उत्पन्न होती है तथा
कानूनी बात सरकारी तरफ से और विपक्षी तरफ से दर्ज होते हैं
जिसमें सरकार के बहुत पैसे खर्च होते हैं
और इसमें नगर निगम प्रशासन जिला राजस्व प्रशासन और प्राधिकरण प्रशासन को समन्वय के साथ समय-समय पर आवश्यक कार्य करना चाहिए
इसके करने से तीन फायदे होंगे
1, जो विवाद होंगे प्रथम दृश्य समाप्त हो जाएंगे तथा
2 ,जो अतिक्रमण के संभावनाएं हैं
वह भी समाप्त हो जाएंगे
तीसरा क्षेत्र के में विकास के जो संभावनाएं हैं
उसको भी रेखांकित किया जाएगा इसके लिए
शासन स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में और
मंडल स्तर पर मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में समिति होनी चाहिए
जो नियमित समीक्षा करें और उसे समीक्षा के कार्यों को आम जनमानस में प्रचारित किया जाए जिससे कि ज्यादा से ज्यादा विश्वास हो सके
तथा सरकार को एक नजूल संबंधी अधिनियम बनाना चाहिए
जिससे सरकार को ज्यादा से ज्यादा सरकारी लैंड मिल सके मामले हो उसका भी समाधान हो
वैसे विगत विधानसभा सत्र में नजूल अधिनियम आया था वह विधान परिषद की प्रवर समिति के पास विचारथीन है
इसको वर्तमान सत्र में पास करने की कार्रवाई करनी चाहिए
इससे भी बहुत सरकार को जमीन प्राप्त होगी
जो विकास के कार्यों में उपयोग में आएगी और
इसके शहरी विकास के क्षेत्र में बेहतर में परिणाम होंगे
तथा सरकार के पास रिजर्व लैंड भी मौजूद होगी
जय हिंद जय भारत
जय अधिवक्ता समाज




