उत्तर प्रदेशलखनऊ
ब्राह्मण को धरती का देवता कहा गया जो सही है प्रामाणिक है पर ब्राह्मणों को भी अपने व्यवहार में परिवर्तन करना चाहिए : डॉ मुरलीधर सिंह “शास्त्री”अधिवक्ता उच्च न्यायालय

ब्राह्मण को धरती का देवता कहा गया जो सही है प्रामाणिक है पर ब्राह्मणों को भी अपने व्यवहार में परिवर्तन करना चाहिए : डॉ मुरलीधर सिंह “शास्त्री”अधिवक्ता उच्च न्यायालय
लखनऊ
आजकल एक विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के राजनीतिक हल्का में कुटुंब बैठक की चर्चा मैं आज इस संबंध में भगवान श्री कृष्ण के श्रीमद् भागवत गीता के
चौथा अध्याय के 13वें श्लोक का जिक्र करूंगा
भगवान श्लोक में कहते हैं
की
(चतुर्थ वर्ण मया सृष्टि
गुण कर्म विभाग )
अर्थात हमने चारों वर्ण का सृजन किया उनके गुण कर्म एवं क्षमता के अनुसार किया है
भारत में जातिवाद नहीं है अब एक समूह बात है जो वर्ण के आधार पर है
डॉ मुरलीधर सिंह शास्त्री
अधिवक्ता
मा उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ
लखनऊ
लखनऊ से27 दिसंबर 2025
जो शिक्षा देता है और ब्राह्मण है सुरक्षा करता है वह क्षत्रिय है जो व्यापार करता है वह वैश्य है हमारे देश में अब शूद्र नहीं सभी में अब जाती सीमा छोड़कर
वर्ण सीमा छोड़कर
रोटी बेटी के रिश्ते हैं
और जिसको हम छोटे समाज करते हैं और छोटे समाज में बड़े समाज की बेटियां ब्याही जाती हैं
जो भारत का वास्तविक प्रतिनिधित्व करते हैं ब्राह्मण समाज के बारे में धर्म शास्त्रों में उल्लेखित है की परमपिता ब्रह्मा के आठ मानस पुत्र हुए जिसमें तीन उत्तर
भारत में दो दक्षिण भारत में
एक पूर्व भारत में
एक पश्चिम भारत में हुआ है
उत्तर भारत मे कानकुंज एवं सरजू परिण कहां गया विंध्य क्षेत्र के के ब्राह्मणों को sanadhya एवं जिउतिया कहा गया
पूर्व भारत के ब्राह्मणों को कलिंग ब्राह्मण कहा गया बंगाल के ब्राह्मणों मिथिला के ब्राह्मणों को मैथिली ब्राह्मण कहा गया पूर्व
पश्चिम के ब्राह्मणों को सौराष्ट्रीय एवं मराठी मराठी ब्राह्मण तथा चित पवनवा ब्राह्मण कहा गया और दक्षिण के ब्राह्मण को द्रविड़ ब्राह्मण एवं गिरी धर्मवीर ब्राह्मण कहा गया
यही आर्यावर्त का ब्राह्मण प्रतिनिधित्व करता है
और मध्यकाल में एक दूसरे क्षेत्रों में आकर अपना बसेरा बनाया जो देवभूमि हमारा हिमालय है
इसमें ऊपरी ब्राह्मण जो पहाड़ पर बसे हैं और नीचे के ब्राह्मण कह गए ऊपरी ब्राह्मण में पंत हुए जोशी हुए और नीचे के ब्राह्मण में तिवारी एवं त्रिपाठी हुए तथा भट्ट हुए यही ब्राह्मण की व्यवस्था
हमारे अध्ययन से प्रचलित ब्राह्मणों ने आपातकाल में संकट काल में धर्म शास्त्रों की रक्षा कंठस्थ धर्मशास्त्र करके की थी
सभी धर्म शास्त्रों को जला दिया जाता था
लेकिन ब्राह्मणों में कंठस्थ किया समय आने पर राजा के संरक्षण में उसकी पुनर्रचना की
इसलिए ब्राह्मण को माहिदेव कहा गया धरती का देवता कहा गया जो सही है |
और प्रामाणिक है पर ब्राह्मणों को भी अपने व्यवहार में परिवर्तन करना चाहिए नहीं
तो उनको अगली पीढ़ी वर्तमान पीढ़ी कभी माफ नहीं करेंगे
सामान्यतः ऐसी बैठकर होती रहती हैं पहले क्षत्रिय समाज की बैठक कुटुंब बैठक हुई और मैं व्यक्तिगत तौर पर एक सामाजिक व्यक्तियों छात्र नेता भी रहा हूं
अधिकारी भी रहा हूं
और अभी मैं अधिवक्ता हूं
हम लोग भगवान राम के भगवान श्री कृष्ण के भगवान परशुराम के भगवान महावीर के भगवान गौतम बुद्ध के परंपराओं में चिंतन में विश्वास करते हैं
जो सभी को लेकर आगे चलते हैं किसी राजनीतिक दृष्टि से किसी समाज किसी भी समाज के लोगों का या जनप्रतिनिधियों का बैठक होना संवैधानिक दृष्टि से गैरकानूनी नहीं है |

और मैं सामाजिक होने के कारण देखता हूं की मौर्य समाज की यादव समाज की कुर्मी समाज की कलार समाज की अन्य समाजों की समाज की बैठक होती है
लेकिन उसकी इतनी चर्चा नहीं होती
जितने इस बैठक की चर्चा हो रही है इसका कारण जो समाज जागरूक होता है
जिसकी समझ में राजनीति में ज्यादा भागीदारी होती है
उसकी ज्यादा चर्चा होती है
ब्राह्मण जात के बारे में मेरा एक स्पष्ट सोच है कि ब्रह्मा यात्री या वैद्य आजकल तीन ही वर्णन है जो भगवान श्री कृष्ण ने गीता के चौथे अध्याय के 13वें शोक में लिखा था कि चतुर्थ वर्णमाम श्रेष्ठ गुण कर्म क्योंकि आरक्षण के कारण देश में बराबरी की स्थितियां आ गई है
एक दूसरे में रोटी बेटी का संबंध हो गया है छोटे जाती के व्यक्ति जब अधिकारी बन जाता है
तो सभी लोग जिसमें ब्राह्मण भी हैं क्षत्रिय एवं वैश्य भी है अपने लड़कियों की शादी करते हैं
जिसके व्यापक उदाहरण है
और जो शासक बन गया है चाहे वह ब्राह्मण हो चाहे वह छतरी हो चाहे पिछड़ा वर्ग का मौर्य हो यादव हो कुर्मी हो या अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग का हो शासन में हो गया वह समान हो गया है
और सामान हो गया है उसके यहां सभी का आना-जाना सभी को सभी लोगों द्वारा उसको बुलाया जाना और उनके द्वारा स्थापित की गई राजनीतिक पार्टियों का चंदा के साथ सदस्य होना
तथा सत्ता में भागीदारी लेना गर्व का विषय हो गया है
हम आज मुख्य रूप से ब्राह्मण का इसलिए कर रहे हैं कि ब्राह्मण समाज ने सामूहिक अपने राजा के साथ अपने शासन के साथ बलिदान दिया है
इसका कोई अलग से बलिदान नहीं हुआ पर
यदि ब्राह्मण समाज नहीं होता तो हम जो सनातन धर्म जिसको कहते हैं वह होता है इसका अनेक कालखंड है पहला खंड इस पर्व है जब आर्यावर्त में बौद्ध धर्म का व्यापक प्रभाव था
तब ब्राह्मणों ने ही धर्मशास्त्र को अपने तरीके से रक्षा की
उसके बाद जो मुगल काल और इस्लाम का लाया तभी ब्राह्मणों एवं राजाओं ने ही धर्म शास्त्रों की रक्षा की
आधुनिक भारत में थी जब जब धर्म पर संकट आया
तब ही ब्राह्मणों ने रक्षा की लखनऊ में विगत दिवस 25 दिसंबर को तीन ब्राह्मण नेताओं की प्रतिमाओं का अनावरण किया गया
इसमें पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी पंडित दीनदयाल उपाध्याय पंडित अटल बिहारी वाजपेई ब्राह्मण समाज के रहे हैं
और इन्होंने बहुत त्याग किया उनके तीनों की प्रतिभा स्थापित की गई सभी ने स्थापित सरकार ने स्थापित कराई
इसकी आलोचना कहीं नहीं हुई क्योंकि सर्व मानता है जो काम किया उसको स्थान मिला
इस तरह लखनऊ में डॉक्टर राम मनोहर लोहिया जो पिछड़े वर्ग से आते थे
उनकी प्रतिमा स्थापित हुई डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जो अनुसूचित जाति वर्ग से आते थे
उनकी प्रतिमा स्थापित हुई
और पंडित जनेश्वर मिश्र
सभी समाज से आते थे उनकी प्रतिमा एवं पार्क स्थापित हुई
सभी ने स्वागत किया और करना पीछे मेरा इसके पीछे विचार है कि जब जातिगत आधार पर नौकरी दी जाती है
जातिगत आधार पर पोस्टिंग होती है
जातिगत आधार पर पार्टी अध्यक्ष बनाए जाते हैं
जातिगत आधार पर मंत्रिमंडल बनाए जाते हैं
जाति आधार पर राज्यपाल बनाए जाते हैं
जाति कर आधार पर न्यायपालिका के अधिकारी चयन किए जाते हैं
तो कोई जाति का आधार पर बैठक करता है
संविधान की दृष्टि से किसी भी दृष्टि से गैरकानूनी नहीं है
हमारे संविधान में व्यवस्था है
की सभी व्यक्ति को संकल्पित होकर राष्ट्र का विकास करना चाहिए
इसके बाद अपने क्षेत्र का विकास करना चाहिए
इसके बाद अपने समाज का विकास करना चाहिए
इसके बाद अपने परिवार का विकास करना चाहिए
इसको हमें किसी भी प्रकार से कोई रोक नहीं है और संवैधानिक अधिकार है
हमेशा सभी को पालन करना चाहिए
पर राष्ट्रवाद से या राष्ट्र से या भ्रष्टाचार से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहिए
तथा किसी पार्टी को अपने पार्टी के नेता जो जातिगत आधार पर बैठकर करते हैं
उनको चेतावनी भी नहीं देना चाहिए चेतावनी देना हो
तो अपने समाज को दें अपने आप को दें
जय हिंद जय भारत
जय राष्ट्रवाद जय संविधान वाद




