उत्तर प्रदेशलखनऊ

प्रतिवादियों को लिखित बहस देकर मुकदमे का निस्तारण करना चाहिए : डॉ मुरलीधर सिंह “शास्त्री”अधिवक्ता उच्च न्यायालय 

प्रतिवादियों को लिखित बहस देकर मुकदमे का निस्तारण करना चाहिए : डॉ मुरलीधर सिंह “शास्त्री”अधिवक्ता उच्च न्यायालय
लखनऊ
देश में विभिन्न प्रकार के लगभग साढे 5 करोड़ मुकदमे लंबित हैं राष्ट्रीय स्तर पर 3.27 लाख में वकील पेश नहीं हुए तथा
 2.22 में किन्ही कारण  से सटे है और
 25000 से ज्यादा भगोड़े अपराधी 21000 से ज्यादा मामलों में दस्तावेजों का इंतजार है
और 927 आर्थिक अपराधी जो विशेष रूप से भगोड़े
यह नेशनल ज्यूडिशल ग्रेड सिस्टम पर सूचनाओं उपलब्ध है |
उत्तर प्रदेश में राजस्व संहिता के अंतर्गत लगभग 10 लाख से ज्यादा मुकदमे लंबित है
संहिता के लागू हुए 13 वर्ष हो चुके हैं तथा
नियमावली के लागू हुई लगभग 9 वर्ष पूरे हो चुके हैं|
मुकदमों के राजस्व मुकदमों के निस्तारण में वादी प्रतिवादी का लिखित बहस ज्यादा कारगर होगा
 (RCCMC) राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रमाण की कार्रवाई बहुत ही कारगर है
इसके आधार पर नियमित समीक्षा किया जाना चाहिए
 ज्यादातर कोर्ट में नियमित बैठक नहीं होती
डॉ मुरलीधर सिंह शास्त्री
अधिवक्ता
 मा उच्च न्यायालय एवं
अध्यक्ष भारतीय ला रिपोर्टर संघ तथा
 पूर्व उपनिदेशक मुख्यमंत्री मीडिया सेंटर लोक भवन
लखनऊ 30 दिसंबर 2025
इसका मुख्य कारण
 समय से सुनवाई न होना
 नियमित कोर्ट की बैठकों का ना होना तथा
 सरकारी एवं प्रतिवादी पक्षों द्वारा लिखित बहस ना दिया जाना है
 हमारे सरकार द्वारा RCCMS सिस्टम लागू किया गया है जो बहुत ही अच्छा है
कुछ राज्य सरकारों इसको अपना रही है जैसे  बिहार आदि
इसमें नियमित समीक्षा की आवश्यकता है
 क्योंकि यह मुख्यमंत्री जी के पहल  पर लागू किया गया था
और नियमित कोर्ट की बैठकों की आवश्यकता है
 इसी प्रकार सूचना आयोग की
एवं उत्तर प्रदेश प्रशासनिक एवं न्यायिक ट्रिब्यूनल के कार्यों की समीक्षा की आवश्यकता है वहां भी कोर्ट नियमित नहीं बैठती है |
 तथा कोर्ट  में वादी  प्रतिवादियों को लिखित बहस देकर मुकदमे का निस्तारण करना चाहिए
ऐसा माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के भी निर्देश हैं
 उत्तर प्रदेश में प्रारंभिक अध्ययन मेरे द्वारा किया गया है जिसमें एक लखनऊ मंडल में बहुत अच्छा कार्य किया गया है
और शायद मंडलआयुक्त का भी तबादला हो गया है और उन्होंने ज्यादातर मामले वादी प्रतिवादी के लिखित बहस के आधार पर निपटाए हैं
अधिवक्ता के रूप मुझे देखने का मौका मिला जो बहुत ही सकारात्मक पहल  है
 इसलिए सरकार को लिखित  बहस  से दिशा निर्देश जानी करना चाहिए
 कम से कम सरकारी वकील तो या जो लगभग 2000 सरकारी वकील है वह तो ऐसा काम कर ही सकते हैं इससे मुकदमों के निस्तारण में तेजी होगी तथा
 आम जन में शांति लाभ होगी
 केस के अंतिम में
गुणात्मक ट्रायल के लिए नारको टेस्ट पॉलीग्राफ टेस्ट इन ब्रेन मैपिंग टेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है
ऐसा माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी दिशा निर्देश दिया है
देश में लगभग 5:30 करोड़ मुकदमे लंबित है यह जानकारी जानकारी विगत सप्ताह हुए संसद के सत्र में कानून मंत्री द्वारा दी गई है इसमें लगभग 90000 मामले सुप्रीम कोर्ट में है तथा माननीय उच्च न्यायालय में लगभग 62 लाख मामले लंबित है पूरे देश के 700 से ज्यादा जिला न्यायालय में लगभग 16 लाख से ज्यादा  मामले ट्रायल में लंबित है जिसमें साढे 13 लाख से ज्यादा आपराधिक पृष्ठभूमि के और शेष दीवानी आदि हैं नेशनल लीगल अथॉरिटी की रिपोर्ट के अनुसार देश में न्यायालय का सबसे ज्यादा खर्च उत्तर प्रदेश बिहार पर मामलों के निस्तारण में किया जाता है
इसमें विधिक सेवा के अंतर्गत कार्य होते हैं और
 लगभग उत्तर प्रदेश के संदर्भ में देखा जाए तो राजस्व न्यायालय के में लगभग 10 लाख से ज्यादा मामले लंबित है इसकी समीक्षा वर्तमान सरकार द्वारा स्थापित आरसीसीएमएस या राजस्व न्यायालय कंप्यूटर प्रबंधन प्रमाण के आधार पर की जाती है
राजस्व न्यायालय में लगभग 2333जो नायब तहसीलदार से लेकर 18 मंडल 75 जनपद और राजस्व परिषद के लखनऊ एवं  प्रयागराज के कार्यालय को मिलाकर हैं
हमारे प्रदेश में राजस्व संहिता उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की अधिसूचना 12 दिसंबर 2012 को हुई थी जो लगभग 13 साल पूरे हो गए हैं तथा इस संबंध राजस्व संहिता नियमावली की अधिसूचना 27 मई 2016 को हुई थी इसके भी 9 साल हो गए हैं
इसमें हमें उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान मध्य प्रदेश विशेष कर हिंदी भाषा भाषा राज्यों को अध्ययन करने पर प्रकाश में आया है कि ज्यादातर राजस्व न्यायालय की नियमित बैठकर नहीं होती इससे बातों का बहुत बड़ा बोझ बड़ा जा रहा है लगभग 10 से 12% तक बाद आते हैं और राजस्ववादों में से लगभग 40 से 50% तक वैसे होते है
जो निश्चित में 2 तारीख पर समाप्त हो सकते हैं
 तथा मौके पर निरीक्षण करके समाप्त किया जा सकता है लेकिन जब राजस्व न्यायालय बैठती  नहीं और तारीख पर तारीख लगती है इससे न्यायालय को बोझ  बढ़ रहा है तथा आपसी विवाद भी बढ़ रहे हैं इस संबंध में मेरा सरकार से निम्न सुझाव है
 राजस्व बाद सुनने वालों को की नियमित कार्यों की समीक्षा किया जाए
और जो सरकारी पक्ष से संबंधित विभाग या सरकारी अधिवक्ता अपने पक्ष से तत्काल अपनी बात रखें
एवं लिखित रूप में रखें तथा बाद के जो अधिवक्ता हैं को लिखित रूप से बात रखें तो इसका निर्धारण जल्द से जल्द होगा
उत्तर प्रदेश के एक मंडल का में जिक्र करना चाहूंगा जिनके मंडल आयुक्त बहुत ही प्रतिभाशाली हैं और उनको उनके कार्यों को अधिवक्ता के रूप में मुझे देखने को मौका मिला उनके राजस्व न्यायालय में ज्यादातर वादों की सुनवाई के प्रतिवादी वादी पक्ष द्वारा लिखित बहस जाती है
साथ ही  इस पर सरकार को विचार करना चाहिए तथा लॉ लार मैनुअल के अनुसार
सरकार द्वारा योग्य अधिवक्ताओं को नियुक्त करना चाहिए
जिससे की जनता की संवेदनाओं को समझ सकें और
 संबंधित पीठासीन अधिकारियों से समय से न्याय दिला सकें
जय हिंद जय भारत जय अधिवक्ता समाज जय भारतीय संविधान

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!