अयोध्याउत्तर प्रदेशसमाज सेवा
सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक सावंत के सर्वे ने खोली अयोध्या नगर निगम “स्वच्छता”की पोल

सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक सावंत के सर्वे ने खोली अयोध्या नगर निगम “स्वच्छता”की पोल
अयोध्या
सोशल मीडिया पर सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक सावंत के सर्वे ने खोली अयोध्या नगर निगम की ‘स्वच्छ’ छवि की पोल
राम की नगरी में स्वच्छता के ऊँचे दावों और हकीकत के बीच गहरा अंतर उजागर हो गया है. सोशल मीडिया पर चलाए गए एक सर्वे ने नगर निगम अयोध्या की सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है. सर्वे में जब नागरिकों से पूछा गया कि नगर निगम अयोध्या की स्वच्छता को आप 10 में से कितने अंक देंगे❓, तो 80 प्रतिशत से अधिक लोगों ने मात्र 01 अंक दिया. शहर के मुख्य मार्गों को छोड़ दें तो शेष साठों वार्ड गंदगी से जूझ रहे हैं. नालियाँ भरी हुई, कचरा बिखरा हुआ और सफाई की अनियमितता आम शिकायत बन गई है|
दूसरे सर्वे में सवाल था कि क्या नगर निगम अयोध्या ने 28वें रैंक स्वच्छ भारत मिशन के लिए आपसे फीडबैक, आपत्ति या सुझाव लिया❓ जवाब और भी चौंकाने वाला रहा. 91 प्रतिशत नागरिकों ने कहा कि नहीं. मात्र 3 प्रतिशत लोगों ने हाँ का जवाब दिया, यानी निगम स्वच्छता का दावा तो करता है, लेकिन जनता की राय लेने या उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनने में पूरी तरह विफल नजर आ रहा है|
◆चुनावी जीत के बाद विपक्ष की चुप्पी◆…
यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है जब हम नगर निगम के राजनीतिक परिदृश्य को देखते हैं. नगर निगम चुनाव के बाद विपक्षी पार्षदों का बोलबाला था, लेकिन महापौर के चुनाव में सपा उम्मीदवार बुरी तरह हार गया. उसके बाद सपा प्रत्याशी राजनीतिक परिदृश्य से लगभग गायब हो गया. जो पार्षद चुने गए, वे भी जनहित के मुद्दों पर सक्रिय होने के बजाय स्वहित पर केंद्रित नजर आ रहे हैं. भाजपा ने नामित सदस्यों और निर्दलीयों के सहारे अपना संख्या बल और मजबूत कर लिया है |
पिछले दिनों आई आडिट रिपोर्ट में नगर निगम की कई योजनाओं में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, लेकिन सदन में इन मुद्दों पर पार्षदों की चुप्पी साफ दिखाई दे रही है. कभी-कभी व्यक्तिगत तुष्टिकरण या छोटे-मोटे मुद्दों पर ही चख-चख सुनाई पड़ती है, बड़े भ्रष्टाचार और जनसुविधाओं की उपेक्षा पर कोई आवाज नहीं उठती,
◆एक साल बाद विधानसभा चुनाव और अयोध्या की नजरें◆
अब जब केवल एक साल बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, तब अयोध्या पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. भाजपा इस सीट को एक बार फिर जीतने का पूरा जोर लगाएगी लेकिन जनहित के मुद्दों खासकर स्वच्छता, सफाई व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर विपक्ष की चुप्पी सपा के लिए भारी पड़ सकती है |
( सर्वे का साइज छोटा हो सकता है लेकिन यह लगभग सभी साठ वार्डों से जवाब आया है, इसलिए महत्वपूर्ण है)




