अयोध्याउत्तर प्रदेश
राम मंदिर चढ़ावा मामला: FIR में आरोपियों के पिता का नाम-पता गायब, बैंककर्मियों को नामजद न करने पर उठे सवाल

राम मंदिर चढ़ावा मामला: FIR में आरोपियों के पिता का नाम-पता गायब, बैंककर्मियों को नामजद न करने पर उठे सवाल
अयोध्या धाम
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर कई नए सवाल सामने आ रहे हैं। एफआईआर में नामजद आठ आरोपियों के पिता का नाम और पता दर्ज नहीं किया गया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाए जाने के बावजूद किसी भी बैंक अधिकारी या कर्मचारी को नामजद नहीं किया गया, जिससे जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर दर्ज एफआईआर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद किया गया है। इसके अलावा नौवें आरोपी के रूप में एक अज्ञात व्यक्ति का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी भी नामजद आरोपी के पिता का नाम या पता एफआईआर में दर्ज नहीं है, जबकि सभी आरोपी मंदिर व्यवस्था से जुड़े बताए जा रहे हैं। ऐसे में ट्रस्ट के रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत की बात सामने आने के बावजूद उन्हें एफआईआर में नामजद नहीं किया गया है। इसे लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्तर पर भी की जा रही है, क्योंकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। बताया जा रहा है कि एफआईआर में प्रयुक्त शब्दों और आरोपों को बेहद सावधानी से तैयार किया गया है तथा एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर गबन का आरोप दर्ज किया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों से अब तक लगभग 70 लाख रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। वहीं, सूत्रों का दावा है कि शुरुआती पूछताछ के दौरान संदिग्धों की निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए गए थे। जांच आगे बढ़ने और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ बरामदगी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
इस बीच, सीसीटीवी फुटेज भी जांच का अहम आधार बनकर सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, करीब 40 दिनों की रिकॉर्डिंग में आरोपी लगभग 70 बार चढ़ावे की रकम निकालते हुए दिखाई दिए हैं। एसआईटी और पुलिस ने इन फुटेज को साक्ष्य के रूप में अपने कब्जे में ले लिया है। प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई गई है कि यह कथित गड़बड़ी पिछले दो से तीन वर्षों से चल रही थी।
उधर, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने से पहले वह इस विषय पर कोई बयान नहीं देंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके नाम से कोई बयान प्रसारित किया जा रहा है, तो वह पूरी तरह भ्रामक है।




