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उत्तर प्रदेशलखनऊ

पेंशन निर्धारण और सीनियरिटी  एक बहुत ही अफसोस जनक है : डॉक्टर मुरलीधर सिंह अधिवक्ता “उच्च न्यायालय”

पेंशन निर्धारण और सीनियरिटी
एक बहुत ही अफसोस जनक है : डॉक्टर मुरलीधर सिंह अधिवक्ता “उच्च न्यायालय”
लखनऊ
हमारे देश में सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालय दीवानी न्यायालय  न्यायालय में लगभग 5 करोड़ से ज्यादा मामले लंबित है
 लगभग 25 करोड़ जनसंख्या से प्रभावित प्रभावित है
 राजस्व न्यायालय के तो भगवान ही मालिक है
 इसको समय से निस्तारण करना चाहिए
 सेवा संबंधी मामले लगभग ढाई लाख से ज्यादा है
 जो आचरण नियमावलियों पर आधारित है
उसकी तत्काल हल हो
 डॉक्टर मुरलीधर सिंह
अधिवक्ता
मा  उच्च न्यायालय इलाहाबाद लखनऊ
एवं
 संयोजक भारत निशुल्क विधि सेवा केंद्र लखनऊ
 मो 7080510634
लखनऊ
 9 अगस्त 2026
यह जानकारी नेशनल जुडिशल डाटा ग्रिड पर आधारित है
 जहां तक सबसे चौंकाने वाला विषय है
इसमें  11:30 लाख मामले पक्ष करो की ओर से वकील के न
आने  के कारण
ढाई लाख मामले पक्षकारों को सुलझाने में इच्छुक ना होने के कारण
ढाई लाख मामले सेवा संबंधी है जो जिसमें एक पक्ष सरकार भी है
और 5 लाख मामले दस्तावेजों के अभाव में है
 दो लाख  मामलों में गवाह पेश नहीं होते और 95 प्रतिशत  दीवानी के हैं
और 35 लाख मामले बुजुर्गों से जुड़े हुए हैं
और 40 लाख मामले महिलाओं से जुड़े हुए हैं ऐसे में हमें सरकार से भी अर्थात कार्यपालिका से भी न्यायपालिका से भी और विधायिका से भी अनुरोध है कि ऐसे मामलों के लिए विभिन्न स्तर पर फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना किया जाए
 और मुकदमों की  तिथि अधिकतम 60 से 70 दिन तक निर्धारित किया जाए
 यदि देखा जाए की 5 करोड़ मामले लंबित है तो लगभग हमारे देश के लगभग 25 करोड़ जनसंख्या और मुकदमों के दबाव में है
सबसे आश्चर्यचकित तो सरकारी महत्व का है जिसमें न्यायालय भी हैं वहां पर ढाई लाख मामले लंबित है
 जिसमें सुप्रीम कोर्ट सेवा नियमावली 1961  उच्च न्यायालय इलाहाबाद सेवा नियमावली 1976
 बिहार अधिकारी सेवा नियमावली 1976
मध्य प्रदेश सेवा नियमावली 1961
भारत सरकार सेवा नियमावली 1961
उत्तर प्रदेश सरकार सेवा नियमावली 1956
के तहत अनेक मामले लंबित है जिसमें कर्मचारियों के वरिष्ठता का निर्धारण है उनके सस्पेंशन है तथा उनके प्रमोशन संबंधी मामले हैं
लगभग 5% से ज्यादा मामले सेवा संबंधी सेवाधिकरण में चल रहे हैं
 जो उनके पेंशन निर्धारण और सीनियरिटी के हैं
एक बहुत ही अफसोस जनक है इसमें सरकार को पहल करके हल करना चाहिए इसके लिए कार्यपालिका के मुख्य अधिकारी और न्यायपालिका के जो प्रशासनिक अधिकारी रजिस्ट्रार है  उनका समय से कार्रवाई करना चाहिए तथा
कार्यालयअध्यक्ष एवं विभाग अध्यक्ष को प्रत्येक माह  समीक्षा करनी चाहिए
 जैसा कि सुप्रीम कोर्टका साफ स्पष्ट दिशा निर्देश है
सेवा संबंधी मामलों का प्रत्येक दशा में 90 दिन के अंदर निस्तारित किया जाए इसका अनुपालन किया जाना चाहिए
जय हिंद जय भारत जय संविधान

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