अयोध्याउत्तर प्रदेश
80वें स्वतंत्रता दिवस पर विशेष: क्या सिर्फ तिरंगा फहराने से हम आजाद हो गए? : वरिष्ठ पत्रकार राकेश तिवारी

80वें स्वतंत्रता दिवस पर विशेष: क्या सिर्फ तिरंगा फहराने से हम आजाद हो गए? : वरिष्ठ पत्रकार राकेश तिवारी
अयोध्या
अयोध्या 15 अगस्त बीत गया पर क्या हम सच में आजाद हैं 1947 में अंग्रेज चले गए लेकिन आज हम भ्रष्टाचार चाटुकारिता और चंद ताकतवर लोगों की व्यवस्था के गुलाम हैं। देश में कई ईमानदार नेता और अधिकारी भी हैं पर मेरी और आपकी असली लड़ाई उस भ्रष्ट तंत्र से है जिसने सत्ता और संसाधनों को कुछ ही हाथों में समेट दिया है।गुलामी के दौर में जब अमर क्रांतिकारियों की एक चिट्ठी को पहुँचने में हफ्तों लगते थे तब उन्होंने उस कठिन समय में देश को आजादी दिलाई। आज तो कलम के सिपाहियों से लेकर देश की आम जनता तक हर एक व्यक्ति के हाथ में डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा हथियार है। फिर भी नेताओं और अफसरों की अकूत संपत्ति और जादुई कमाई पर सवाल पूछने के बजाय आज का युवा भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद राजगुरु सुखदेव और देश के सभी क्रांतिकारी महापुरुषों तथा राष्ट्रप्रेमियों की अमर विचारधाराओं को भूलकर बाहुबलियों और गाड़ियों के काफिलों को अपना भगवान मान रहा है।हालाँकि समाज में कुछ निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकार भी हैं जो आज भी जोखिम उठाकर सच को सामने लाते हैं, लेकिन एक बड़ा वर्ग और कुछ पत्रकार भ्रष्ट नेताओं के साथ सेल्फी लेने और मौका ढूंढने में गर्व महसूस करने लगे हैं। अगर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने भी यही चाटुकारिता की होती तो देश कभी आजाद न होता।इन्ही अमर क्रांतिकारियों की प्रेरणा लेकर अब हमें सत्ता में बैठे लोगों के हर शब्द और काम पर सवाल उठाना शुरू करना होगा। यह काम केवल पत्रकारों का नहीं बल्कि देश के हर नागरिक का है। यदि कोई आम नागरिक सीधे सवाल नहीं कर सकता तो उसका कर्तव्य है कि वह सवाल उठाने वाले निष्पक्ष पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता की ढाल बने, उसकी ताकत बने ताकि कोई ताकतवर व्यक्ति अपनी सत्ता या धनबल के दम पर स्वतंत्र पत्रकार की कलम और आवाज को दबा न सके।80वें वर्ष में हमें सिर्फ तिरंगा फहराकर चुप नहीं बैठना है। हमें और आपको मिलकर यह संकल्प लेना होगा कि अपने वार्ड, गांव विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र के विकास कार्यों का लेखा-जोखा तैयार कर जमीनी सवाल उठाएंगे। इन सवालों को सोशल मीडिया के जरिए जनता के सामने लाकर एक बड़ा डिजिटल अभियान चलाएंगे और व्यवस्था परिवर्तन की इस लड़ाई के लिए जरूरत पड़ने पर एक मंच पर एकजुट होकर खड़े होंगे।चाटुकारिता छोड़ आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछना ही सच्ची देशभक्ति है। जब हम सब मिलकर यह लड़ाई लड़ेंगे तभी एक बड़ा और बेहतर बदलाव होगा जो हमारे बच्चों देश और सभी देशवासियों के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य का निर्माण करेगा। बदलाव की शुरुआत अब और यहीं से होगी।




