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अयोध्याउत्तर प्रदेश

किसी व्यक्ति के बारे में पर्चा बनाना कोई अध्यात्म या सिद्ध ज्ञान का प्रमाण नहीं है : महंत एकनाथ महाराज

किसी व्यक्ति के बारे में पर्चा बनाना कोई अध्यात्म या सिद्ध ज्ञान का प्रमाण नहीं है : महंत एकनाथ महाराज
अयोध्या धाम
पांडुकर धाम सरकार की पर्चा-चुनौती पर महंत एकनाथ महाराज का पलटवार, बोले- ‘यह अध्यात्म नहीं, मनोरंजन की कला’
पूज्य संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम और उनके दिवंगत शिष्य रसिक लाल से जुड़ी घटना को लेकर धर्मनगरी वृंदावन में चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच अयोध्या तपस्वी छावनी के जगद्गुरु परमहंस आचार्य के उत्तराधिकारी महंत एकनाथ महाराज ने पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पर्चा बनाने का दावा करने वाले संतों पर तीखा निशाना साधा है।
महंत एकनाथ महाराज ने कहा कि पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के मौन को उनकी कमजोरी या अज्ञानता समझना बड़ी भूल होगी। उनके मुताबिक प्रेमानंद जी महाराज संविधान, कानून और न्याय व्यवस्था में विश्वास रखते हैं और चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा सच्चाई सामने आए।
‘गुरु के लिए शिष्य पुत्र के समान’
महंत एकनाथ महाराज ने कहा कि गुरु के लिए शिष्य पुत्र के समान होता है। रसिक लाल के निधन से प्रेमानंद जी महाराज को गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार ऐसे दुख के समय मौन और संयम रखना उचित है। इसलिए उनके मौन को किसी भी रूप में कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए।
‘दुख की घड़ी में बयानबाजी उचित नहीं’
उन्होंने कुछ साधु-संतों की कथित बयानबाजी पर भी नाराजगी जताई। महंत ने कहा कि किसी संत के आश्रम या परिवार में दुखद घटना होने पर संवेदना और संयम अपेक्षित है। ऐसी स्थिति में बयानबाजी कर अपनी चर्चा या प्रचार बढ़ाना संत परंपरा के अनुरूप नहीं है।
पर्चा चुनौती पर साधा निशाना
पांडुकर धाम सरकार की ओर से पर्चा बनाने की चुनौती को लेकर महंत एकनाथ महाराज ने कहा कि किसी व्यक्ति के बारे में पर्चा बनाना कोई अध्यात्म या सिद्ध ज्ञान का प्रमाण नहीं है। उन्होंने इसे ‘एंटरटेनमेंट की कला’ बताते हुए दावा किया कि समय आने पर इसके पीछे के रहस्य को सामने लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि “जिस दिन इसका रहस्य टूटेगा, उस दिन पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।” महंत ने यह भी कहा कि सच्चे संत में अहंकार नहीं होता और जो स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने में लगा रहता है, वह संत परंपरा की मूल भावना से दूर हो जाता है।
‘कानून ही बताएगा असली सच्चाई’
महंत एकनाथ महाराज ने कहा कि रसिक लाल के साथ वास्तव में क्या हुआ, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच और कानून की प्रक्रिया से ही सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि “कानून से बड़ा कोई चमत्कार नहीं है।” उनके मुताबिक जांच पूरी होने के बाद सच्चाई स्वयं सामने आ जाएगी।
महंत ने प्रेमानंद जी महाराज को श्री राधारानी की भक्ति में समर्पित संत बताते हुए कहा कि उनके मौन और संयम को गलत अर्थ देना उचित नहीं है। उन्होंने दोहराया कि पूरे मामले में कानून और निष्पक्ष जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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