अयोध्याउत्तर प्रदेशधर्म

अयोध्या में 130 विद्वान कर रहे वाल्मीकि रामायण का सामूहिक पारायण, विश्व कल्याण के लिए नौ दिवसीय अनुष्ठान

श्री नरसिम्हा मूर्ति के मार्गदर्शन में आयोजन, चंद्रशेखर शर्मा और पराली श्रीकांत कर रहे पारायण का नेतृत्व

अयोध्या में 130 विद्वान कर रहे वाल्मीकि रामायण का सामूहिक पारायण, विश्व कल्याण के लिए नौ दिवसीय अनुष्ठान

श्री नरसिम्हा मूर्ति के मार्गदर्शन में आयोजन, चंद्रशेखर शर्मा और पराली श्रीकांत कर रहे पारायण का नेतृत्व

अयोध्या

रामनगरी अयोध्या में विश्व कल्याण, विश्व शांति और सनातन धर्म के संरक्षण की कामना के साथ नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। पांडुरंग भजन मंडली ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न शहरों से आए 130 रामायण पाठ में दक्ष विद्वान सामूहिक रूप से श्रीमद् वाल्मीकि रामायण का पारायण कर रहे हैं। मंडली के प्रमुख एवं गुरुजी श्री नरसिम्हा मूर्ति के मार्गदर्शन में हो रहे इस आयोजन में प्रमुख विद्वान श्री चंद्रशेखर शर्मा और श्री पराली श्रीकांत रामायण पारायण का नेतृत्व कर रहे हैं। कार्यक्रम में दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों से 400 से अधिक श्रद्धालु और विद्वान शामिल हुए हैं।…आयोजन के अंतर्गत प्रतिदिन सुबह छह बजे से दोपहर एक बजे तक वाल्मीकि रामायण के छह कांडों बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड और युद्धकांड का पारायण किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन भी आयोजित हो रहे हैं। दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक तमिल भाषा में प्रवचन होता है, जबकि शाम 6:30 से रात आठ बजे तक दूसरे सत्र में रामायण और धर्म से जुड़े विषयों पर व्याख्यान दिया जाता है।
आयोजन में रामलला के जन्मोत्सव, सीता विवाह महोत्सव, वेद पारायण, चंडी होम, कन्या पूजा, गज पूजा और अश्व पूजा सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं और विद्वानों के लिए भोजन तथा अन्य धार्मिक सेवाओं की व्यवस्था भी की गई है। कार्यक्रम के अंतिम दिन भगवान श्रीराम के सानिध्य में सीता कल्याण महोत्सव आयोजित किया जाएगा। मंडली के प्रतिनिधि के अनुसार, पांडुरंग भजन मंडली ट्रस्ट पिछले करीब 40 वर्षों से देश के विभिन्न पवित्र स्थलों पर भागवत कथा, रामायण पारायण, वेद पाठ और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित करता आ रहा है। अयोध्या में इस आयोजन का उद्देश्य भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर सामूहिक आराधना के माध्यम से विश्व शांति, परिवारों के कल्याण और सनातन धर्म की परंपराओं के संरक्षण का संदेश देना है।

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