अयोध्याउत्तर प्रदेश
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में सत्य उजागर होने के संकल्प के साथ 25 दिन के मौन व्रत पर गए राजषि महंत एकनाथ महाराज

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में सत्य उजागर होने के संकल्प के साथ 25 दिन के मौन व्रत पर गए राजषि महंत एकनाथ महाराज
अयोध्या धाम
रामनगरी अयोध्या के संत राजषि महंत एकनाथ महाराज ने 23 जून से 18 जुलाई तक 25 दिनों के मौन व्रत का संकल्प लिया है। इस अवधि में वह किसी से वार्ता नहीं करेंगे तथा साधना, आत्मचिंतन और भागवत अध्ययन में समय व्यतीत करेंगे। उनके आश्रम की ओर से जारी सूचना में श्रद्धालुओं और अनुयायियों से इस अवधि में फोन अथवा अन्य माध्यमों से संपर्क न करने का अनुरोध किया गया है।
राजषि महंत एकनाथ महाराज ने बताया कि उनका यह मौन व्रत केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक विशेष संकल्प भी है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में सत्य सामने आए और वास्तविक दोषी का नाम सार्वजनिक हो, इसी उद्देश्य से उन्होंने यह मौन व्रत धारण किया है।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में मौन को श्रेष्ठ तप माना गया है। पुराणों और संत परंपरा में वर्णित है कि वाणी का संयम साधक को आत्मज्ञान, आत्मशुद्धि और ईश्वर के निकट ले जाता है। श्रीमद्भागवत महापुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में मौन को मन और इंद्रियों पर नियंत्रण का प्रभावी माध्यम बताया गया है। ऋषि-मुनियों ने भी ज्ञान और सत्य की प्राप्ति के लिए मौन साधना को महत्वपूर्ण माना है।
महंत एकनाथ महाराज के अनुसार मौन व्रत व्यक्ति को आत्ममंथन का अवसर प्रदान करता है। जब मनुष्य बाहरी शोर-शराबे से दूर होकर भीतर की ओर ध्यान केंद्रित करता है, तब उसे अपने जीवन, कर्तव्यों और आध्यात्मिक उद्देश्यों का बोध होता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी मौन मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
उन्होंने बताया कि 25 दिन की साधना पूर्ण होने के बाद वह नए संकल्प और ऊर्जा के साथ सनातन धर्म, हिंदू राष्ट्र तथा समाज में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने के विषयों पर आगे कार्य करेंगे।
आश्रम की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि राजषि महंत एकनाथ महाराज ने 25 दिनों का मौन व्रत धारण किया है, इसलिए इस अवधि में उनसे किसी प्रकार की बातचीत संभव नहीं होगी। उनके अनुयायी इस दौरान उनके संकल्प की सफलता और आध्यात्मिक साधना की पूर्णता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।




