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अयोध्याउत्तर प्रदेश

समावेश करते-करते कई राज्यों में हिंदू हो गए अल्पसंख्यक’ : महंथ श्री राजू दास

समावेश करते-करते कई राज्यों में हिंदू हो गए अल्पसंख्यक’ : महंथ श्री राजू दास
अयोध्या धाम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वर्ष 2003 में अयोध्या के प्रसिद्ध सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी परिसर में नमाज़ पढ़े जाने का उल्लेख किए जाने के बाद, इस संवेदनशील विषय पर देशभर में एक नई बहस छिड़ गई है। इस बीच, अयोध्या के संत समाज के भीतर ही इस मुद्दे को लेकर तीखे मतभेद और वैचारिक टकराव खुलकर सामने आ गए हैं। सनातन धर्म की व्यापकता और सीमाओं को लेकर अयोध्या के बड़े धर्मगुरु अब आमने-सामने आ चुके हैं।
# **समंदर सबका पानी स्वीकार करता है, नाले का भी: महर्षि महंत एकनाथ महाराज**
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर के उत्तराधिकारी महर्षि महंत एकनाथ महाराज ने इस पूरे विवाद पर बेहद गंभीर और दार्शनिक रुख अपनाते हुए कहा कि हनुमानगढ़ी में यदि मुसलमान साक्षात संकटमोचन हनुमान जी की शरण में आकर नमाज़ पढ़ते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
एकनाथ महाराज ने एक विशेष वक्तव्य में कहा, *”मान लो कि भारत के सभी मुसलमान पाकिस्तान चले जाएं या सभी हिंदू बन जाएं, तो क्या देश में लड़ाई-झगड़े हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे? क्या इससे देश में शांति आ जाएगी?”* उन्होंने आगे कहा कि जो लोग समाज को बांटने की राजनीति करते हैं, उन्हें समंदर के चरित्र को समझना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया, *”समंदर कभी यह नहीं कहता कि उसे सिर्फ गंगा और यमुना का पवित्र जल स्वीकार है और नाले का पानी स्वीकार नहीं है। समंदर का काम सबको अपने भीतर समाहित करना और सबको शुद्ध करना है। सनातन धर्म भी ठीक इसी तरह एक विशाल समुद्र है।”
उन्होंने तत्कालीन हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे सनातन की पराजय नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विजय करार दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमान भी यह जानते हैं कि सनातन ही उनकी मूल सांस्कृतिक धारा है। सरकार और नेताओं को ऐसे मुद्दों पर राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाने के बजाय ‘सबके साथ सबके विश्वास’ की भावना को आगे बढ़ाना चाहिए।
*समावेश की नीति से हिंदू संकट में: संत राजू दास “
दूसरी तरफ, हनुमानगढ़ी के ही प्रमुख संत राजू दास ने महर्षि महंत एकनाथ महाराज के इन विचारों से पूरी तरह असहमति जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्टैंड का खुला समर्थन किया है। संत राजू दास ने वर्ष 2003 की घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि धार्मिक परिसरों में इस तरह के आयोजनों को किसी भी कीमत पर बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
राजू दास ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “सनातन धर्म सभी मतों और अन्य मजहबों का समावेश करते-करते आज खुद संकट में आ गया है। इसी अत्यधिक उदारता का नतीजा है कि आज देश के कई राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं।” उन्होंने साफ किया कि सनातन की रक्षा के लिए धार्मिक मर्यादाओं और परिसरों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
धार्मिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बनी अयोध्या मुख्यमंत्री के एक बयान ने जहाँ राजनीति के गलियारों में हलचल पैदा की थी, वहीं अब अयोध्या के संतों के दो धड़ों में बंट जाने से यह मामला पूरी तरह से धार्मिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। एक तरफ जहाँ सनातन को सबको गले लगाने वाला एक ‘विशाल समुद्र’ बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपनी धार्मिक पहचान और जनसांख्यिकीय (demographic) सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। आने वाले दिनों में यह वैचारिक जंग और तेज होने के आसार हैं। और अंत मे बड़ी बात एक नाथ महाराज ने कही की यूपी के मुख्यमंत्री मुसलमान के खिलाफ नहीं है अगर मुसलमान के खिलाफ होते  तो उनके मंदिर में एक बहुत खास मुसलमान है जो वहां पूजा करता है और रहता है l

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