अयोध्याउत्तर प्रदेश
अयोध्या धाम में विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक महा-परिसर का निर्माण होगा : पंडित राजेंद्र त्रिपाठी जी (केंद्रीय संयोजक एवं अध्यक्ष)

अयोध्या धाम में विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक महा-परिसर का निर्माण होगा : पंडित राजेंद्र त्रिपाठी जी (केंद्रीय संयोजक एवं अध्यक्ष)
अयोध्या धाम
”गोस्वामी तुलसीदास जयंती के पावन पर्व पर ऐतिहासिक उद्घोष “
अयोध्या धाम में पावन सरयू तट पर 10,000 एकड़ भूमि चिन्हित : 11 सितंबर 2026 से प्रारंभ होगा “श्रीरामराज पुनर्निर्माण महायज्ञ”
”तुलसी जसि भवतव्यता तैसी मिलइ सहाइ।
आपुनु आवइ ताहि पहिं ताहि तहां लै जाइ।।”
गोस्वामी तुलसीदास जी की पावन जयंती के शुभ अवसर पर आर्थिक पहल मंच/ फोरम ऑफ फाइनेंशियल इनिशिएटिव्स (FFI) एवं श्रीरामराज पुनर्निर्माण महायोजना 2026-2029 के केंद्रीय सचिवालय द्वारा एक युगांतकारी निर्णय की घोषणा की गई है।
प्रभु श्री राम लला की पावन जन्मभूमि अयोध्या धाम में विगत 1 अगस्त 2026 को पावन सरयू तट पर 10,000 एकड़ भूमि का स्थलीय चिन्हीकरण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस पावन धरा पर आगामी 11 सितंबर 2026 से ऐतिहासिक अनुष्ठानों एवं सभ्यतागत कार्यों का प्रत्यक्ष शुभारंभ किया जा रहा है।

🚩 श्री राजसूय महायज्ञ (2026–2039) : जन-प्रतिनिधित्व एवं राजधर्म का पावन संकल्प
”श्रीरामराज पुनर्निर्माणार्थ, श्री राजसूय महायज्ञ (2026-2039)” केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतवर्ष में लोक-कल्याणकारी राजधर्म, सुशासन और नैतिक जन-प्रतिनिधित्व की पुनर्स्थापना का विराट सभ्यतागत अभियान है।
यह महायज्ञ जन-प्रतिनिधित्व (ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष, पार्षद, विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति पद) के कर्तव्यों, नैतिक दायित्वों और लोक-कल्याण के संकल्प को सुदृढ़ करने का प्रमुख अनुष्ठानिक आधार है।
महायज्ञ का स्वरूप : इसमें वैदिक परंपरा के अनुसार अनेक विविध इष्टियाँ एवं अनुष्ठान सम्मिलित हैं।
प्रारंभ एवं कालावधि : इस महा-अभियान की पृष्ठभूमि फाल्गुन मास (02 फरवरी 2026, वसंत ऋतु के प्रथम दिवस) से प्रारंभ होकर, आगामी 14 वर्षों तक सम्पूर्ण भारतवर्ष सहित वैश्विक स्तर पर “श्रीरामराज पुनर्निर्माण महायोजना 2039” के पूर्ण होने तक अनवरत संचालित रहेगी।
🏛️ 10,000 एकड़ भूमि पर चतुर्वर्ग पुरुषार्थ महा-परिसर
सरयू तट पर चिन्हित 10,000 एकड़ भूमि पर विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक महा-परिसर (Shriramraj ISEC) का निर्माण होगा, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संतुलन पर आधारित होगा।
धर्म व ज्ञान : विश्वस्तरीय वैदिक गुरुकुल, रामायण शोध संस्थान एवं सनातन संस्कार केंद्र।

अर्थ व स्वावलंबन : ग्रामीण सहकारिता, एग्रोफॉरेस्ट्री, ओएनडीसी (ONDC) डिजिटल कॉमर्स और किसान आत्मनिर्भरता ग्रिड।
काम व संस्कृति : भारतीय कलाग्राम, पंचकर्म व आयुर्वेदिक आरोग्य केंद्र और पर्यावरण-अनुकूल आवास।
मोक्ष व शांति : सरयू तट पर मौन ध्यान केंद्र एवं वानप्रस्थ एवं सन्यास साधना कुटीर।
पंडित राजेंद्र त्रिपाठी जी (केंद्रीय संयोजक एवं अध्यक्ष) ने देश एवं विदेश के समस्त सनातन प्रेमियों, प्रबुद्ध नागरिकों और जन-प्रतिनिधियों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रभु श्री राम का आदर्श ही भारत को 2039 तक विश्व की सर्वोच्च नैतिक व आर्थिक महाशक्ति बनाएगा।
भवदीय,
केंद्रीय प्रेस एवं जनसंपर्क प्रकोष्ठ
फोरम ऑफ फाइनेंशियल इनिशिएटिव्स (FFI) / श्रीरामराज पुनर्निर्माण महायोजना 2026-2039) सचिवालय
केंद्रीय कार्यालय : 304, इरोज अपार्टमेंट, 56 नेहरू प्लेस, नई दिल्ली – 110019
संपर्क: +91-7011804666 / +91-9625885508




