अयोध्याउत्तर प्रदेश

पूर्वजों की तपोभूमि पर पहुंचे निशिकांत तिवारी, बोले—करुणा सिंधु महाराज जैसे सिद्ध संत हमारे परिवार में जन्मे, यह हमारे लिए गर्व की बात

पूर्वजों की तपोभूमि पर पहुंचे निशिकांत तिवारी, बोले—करुणा सिंधु महाराज जैसे सिद्ध संत हमारे परिवार में जन्मे, यह हमारे लिए गर्व की बात
अयोध्या
 रामनगरी अयोध्या के जानकी घाट स्थित सिद्ध पीठ स्थान पर पहुंचे निशिकांत तिवारी ने अपने पूर्वजों की तपस्या और करुणा सिंधु महाराज से जुड़ी पारिवारिक विरासत को याद करते हुए इसे अपने लिए गौरव और सौभाग्य का क्षण बताया। पत्नी व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पहुंचे निशिकांत तिवारी ने सिद्ध पीठ के दर्शन कर गुरुदेव श्री जनमेजय शरण जी महाराज का आशीर्वाद लिया।
उन्होंने कहा कि “हम अपने आपको परम सौभाग्यशाली और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि इस पवित्र भूमि पर आने का अवसर मिला। यह वही स्थान है, जिसे हमारे पूर्वजों ने तपस्या और साधना से पवित्र किया।” उन्होंने बताया कि करुणा सिंधु महाराज उनके पितामह के भी बाबा रहे हैं और परिवार में उनके आध्यात्मिक योगदान की चर्चा आज भी श्रद्धा के साथ होती है।
निशिकांत तिवारी ने कहा कि इस स्थान पर पहुंचकर उन्हें अपने पूर्वजों की स्मृतियों और उनकी साधना से जुड़ने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए यह बेहद गौरव की बात है कि उनके खानदान में ऐसे सिद्ध संत का जन्म हुआ और उनके पूर्वजों को उनका सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। “हम आज भी उन्हीं के आशीर्वाद से फल-फूल रहे हैं और उनकी तपस्या की परंपरा हमें प्रेरणा देती है।”
उन्होंने सिद्ध पीठ के वर्तमान स्वरूप की सराहना करते हुए कहा कि मंदिर अब बेहद सुसज्जित और भव्य हो गया है। उन्होंने गुरुदेव श्री जनमेजय शरण जी महाराज के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि मंदिर और आध्यात्मिक केंद्र दिन-दूनी रात-चौगुनी प्रगति करे, यही उनकी कामना है।
इस दौरान उनकी पत्नी ने भी सिद्ध पीठ पहुंचने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मंदिर का स्वरूप बेहद सुंदर और सुसज्जित हो गया है। निशिकांत तिवारी ने बताया कि उनके साथ परिवार के दोनों बेटे, बेटियां, भांजी, भाई-बहन सहित पूरा परिवार इस पावन स्थल पर पहुंचा है।
उन्होंने गुरुदेव श्री जनमेजय शरण जी महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि वे उनके गुरु भी हैं और उनका मार्गदर्शन परिवार को निरंतर मिलता रहा है। “हम गुरुदेव को पहले दंडवत करते हैं। उनका कुशल नेतृत्व और दिशा-निर्देशन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। वे सदैव हमारी सद्बुद्धि के विकास के लिए कार्य करते हैं। हम उनके सदा आभारी और ऋणी रहेंगे।”
अंत में उन्होंने गुरुदेव महाराज के दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना करते हुए कहा कि सिद्ध पीठ की आध्यात्मिक परंपरा निरंतर आगे बढ़े और अधिक से अधिक लोग यहां आकर प्रेरणा प्राप्त करें।

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