अयोध्याउत्तर प्रदेश
सभी पात्र श्रमजीवी एवं मान्यता प्राप्त पत्रकारों और वकीलों को पेंशन दिया जाए : डॉ मुरलीधर सिंह “अधिवक्ता उच्च न्यायालय”

सभी पात्र श्रमजीवी एवं मान्यता प्राप्त पत्रकारों और वकीलों को पेंशन दिया जाए : डॉ मुरलीधर सिंह “अधिवक्ता उच्च न्यायालय”
लखनऊ
सभी 60 वर्ष से ऊपर के सभी अधिवक्ताओं एवं श्रमजीवी/ मान्यता प्राप्त पत्रकारों को सरकार द्वारा पेंशन दिया जाए
प्रयागराज के मा उच्च न्यायालय
बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी ने वकीलों के कैशलेस इलाज के लिए 5 लाख तक की घोषणा की है
तथा आर्थिक सहायता है 5 लाख की भी घोषणा की गई है |
उसी क्रम में हमारे मुख्यमंत्री जी से मांग है कि
सभी 60 वर्ष से ऊपर के पत्रकारों को एवं अधिवक्ताओं को पेंशन दिया जाए उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में लगभग लगभग 4:50 लाख पंजीकृत अधिवक्ता है |
तथा उत्तर प्रदेश सरकार के अंतर्गत प्रदेश मुख्यालय लखनऊ में लगभग 1100 तथा
जनपदों में लगभग साढे सात हजार (7500) मान्यता प्राप्त पत्रकार है |

इन सभी को पेंशन दिया जाए इसमें से मात्र 20% लोग ही पेंशन पाने के लिए पात्रता रखते हैं |
क्योंकि अनेक पत्रकार प्रचार एजेंसी विज्ञापन एजेंसी एवं अन्य कारोबार में भी संलग्न है
अन्य प्रदेशों में जैसे उत्तराखंड में बिहार में मध्य प्रदेश में भी पत्रकारों को जो 60 वर्ष से ऊपर के हो गए हैं जो वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 के तहत पात्र हैं
तथा सरकार से मान्यता प्राप्त हैं उनको पेंशन की व्यवस्था की गई है
उनको निशुल्क बस यात्रा की भी सुविधा प्रदान की गई इसी तरह हमारे उत्तर प्रदेश सरकार के सभी अधिवक्ताओं को निशुल्क बस में यात्रा की सुविधा प्रदान किया जाए
तथा उनका विधिक रिपोर्टर की मान्यता भी प्रदान किया जाए |
संबंध में शीघ्र ही मेरे द्वारा मा प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखा जाएगा
सभी पात्र श्रमजीवी एवं मान्यता प्राप्त पत्रकारों को पेंशन दिया जाए |
डॉक्टर मुरलीधर सिंह
अधिवक्ता मा उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ
राष्ट्रीय अध्यक्ष संयोजक एवं अध्यक्ष ला रिपोर्टर संघ एवं भारत में शुल्क विधिक सेवा केंद्र लखनऊ एवं अयोध्या
लखनऊ 27सितम्बर 2026
अधिवक्ता एवं पत्रकार जो अपने-अपने प्रोफेशन के 20 साल से ज्यादा काम कर चुके हैं उनको पेंशन योजना में कवर किया जाना चाहिए
मेरे द्वारा नजदीक से पत्रकारों एवं अधिवक्ताओं के व्यवसाय को देखा गया है तथा उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है क्योंकि दोनों सम्मानित प्रोफेशन है तथा दोनों के योगदान से ही (भारत की आजादी मिली है )
पत्रकारों के लिए जो पत्रकार 58 साल पूरा कर चुके हैं तथा श्रमजीवी पत्रकार हैं तथा सूचना विभाग द्वारा लगभग 20 साल से मान्यता प्राप्त है उनको अनिवार्य रूप से उत्तराखंड सरकार बिहार सरकार सरकार गुजरात सरकार की तरह एक पेंशन दिया जाए
पेंशन का आधार वार्षिक आय 5 लाख रखा जाए अधिवक्ताओं को जिनकी इनकम टैक्स का विवरण मांगा कर जो विवरण देते हैं वैसे नए अधिवक्ताओं को
(Stipend )पेट के तौर पर आर्थिक सहायता दिया जा सकता है
इसमें संबंधित उच्च न्यायालय के एवं जनपदों के बार संगठन से प्रस्ताव मंगाकर काम किया जा सकता है
इसमें हमारे प्रदेश के बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश चुनाव नवनिर्वाचित हो रहा है
उसको एवं बार काउंसिल इंडिया को एक सार्थक प्रयास करना चाहिए
जिससे कि पत्रकारों में अधिवक्ताओं का अधिवक्ताओं की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके तथा
उनके चैंबर के विकास के लिए भी सरकार प्रत्येक साल 25000 अनुदान दे तो और अच्छा कार्य हो सकता है
जिसका नियमित रूप से जो नियमित रूप से अपने पत्रकारिता एवं अधिवक्ता के व्यवसाय को करते हैं
उनका सर्वोच्च प्राथमिकता दिया जाना चाहिए लोकतंत्र है इसमें दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार को प्रचार एजेंसी के भरोसे न रहकर
सरकारी एजेंसियों एवं सरकारी कर्मचारियों को भी विश्वास करना चाहिए
कुछ पत्रकार प्रचार एजेंसी चलाते हैं कुछ पत्रकार इलेक्ट्रॉनिक चैनल चलते हैं तथा कुछ पत्रकार अन्य व्यवसाय में संलग्न
वैसे पत्रकारों को पेंशन योजना से बाहर किया जाए तथा
लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा एवं आवास विकास द्वारा तथा राज्य संपति विभाग द्वारा जिन पत्रकारों को आवास आवंटित है तथा प्राधिकरण के द्वारा उनको सस्ते दर पर भूखंड आवंटित किया गया है
वैसे पत्रकारों को इस पेंशन योजना से बाहर रखा जाए ऐसे में जहां तक मुझे जानकारी है लगभग प्रदेश मुख्यालय पर लगभग 1100 ऐसे पत्रकार है तथा पूरे 75 जनपद का देखा जाए तो लगभग 7500 और बढ़ जाएंगे
इस प्रकार हमारे प्रदेश पर केवल पेंशन पत्र पत्रकारों की अधिकतम संख्या 5000 से तथा अधिवक्ताओं की संख्या 125000 के आसपास होगी जो पेंशन पाने के हकदार है
ऐसे में सरकार का वार्षिक ब बजट लगभग 15 करोड़ से पत्रकारोंएवं अधिवक्ताओं को को निश्चित समय तक पेंशन दिया जा सकता है

जब हम वृद्धावस्था पेंशन देते हैं जब हम विधवा पेंशन देते हैं तथा कलाकारों को आर्थिक लाभ देते हैं तो पत्रकारों को अधिवक्ताओं को क्यों नहीं दे सकते
श्री सिंह नेकहा की विस्तृत पत्र माननीय मुख्यमंत्री जी को भी शीघ्र लिखूंगा
जिसमे नियमों का हवाला होगा क्योंकि हमारे पास उच्च न्यायालय में अधिवक्ता होने के कारण अनेक मुकदमे आए हैं
जिसमें पत्रकारों की आर्थिक स्थिति का पता चलता है
इसलिए सरकार को इस मामले में संवेदनशील होना चाहिए
जय हिंद जय भारत जय लोकतंत्र जय भारतीय संविधान




