अयोध्याउत्तर प्रदेश

पं. उमापति त्रिपाठी की जयंती पर चार अक्टूबर को रामकथा पार्क में होगा सम्मान समारोह

पं. उमापति त्रिपाठी की जयंती पर चार अक्टूबर को रामकथा पार्क में होगा सम्मान समारोह
अयोध्या धाम
वशिष्ठोपाख्य पं. उमापति त्रिपाठी की कीर्ति और उनके सनातन संस्कृति के उत्थान में योगदान को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से वशिष्ठ फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से वर्ष 2018 में शुरू किए गए वशिष्ठ सम्मान की श्रृंखला में इस वर्ष जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर जी महाराज को सम्मानित किया जाएगा। वहीं, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान योद्धा बृजनंदन ब्रह्मचारी की स्मृति में प्रदान किया जाने वाला बृजनंदन ब्रह्मचारी सम्मान इस वर्ष दि आयुष्मान फाउंडेशन को दिया जाएगा।
वशिष्ठ फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने बताया कि पं. उमापति त्रिपाठी की चित्र-मातृ नवमी के उपलक्ष्य में सम्मान समारोह चार अक्टूबर को रामकथा पार्क में दोपहर तीन बजे आयोजित किया जाएगा।
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक होंगे। इस अवसर पर भजन संध्या का भी आयोजन होगा, जिसमें प्रसिद्ध कलाकार रूपेश मिश्र प्रस्तुति देंगे।
उन्होंने बताया कि पं. उमापति त्रिपाठी का सनातन संस्कृति के उत्थान में अविस्मरणीय योगदान रहा है। उन्होंने संस्कृत और हिंदी में अनेक विशिष्ट रचनाओं की रचना की, जिनमें दर्शन, अध्यात्म और रसोपासना प्रमुख विषय रहे। विद्वानों ने उनकी लगभग 48 रचनाओं का उल्लेख किया है। पं. उमापति त्रिपाठी प्रभु श्रीराम को राजकुमार के रूप में अपना शिष्य तथा स्वयं को उनका गुरु, मित्र एवं सभासद मानते थे। उनकी इसी उपासना भावना से मंदिर में विराजमान श्रीराम को  आशीष प्रदान किए जाने की आलौकिक घटना भी अयोध्या की धार्मिक परंपरा में विशेष रूप से चर्चित है।
महापौर ने बताया कि वशिष्ठ सम्मान की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। प्रथम वशिष्ठ सम्मान अयोध्या के ख्यातिप्राप्त विद्वान पं. विश्वेश्वरी प्रसाद शुक्ल “ब्रह्मचारी’ को प्रदान किया गया था। इसके बाद यह सम्मान प्रकांड विद्वान ब्रह्मानंद पाठक, मणिरामदास छावनी के पूज्य महंत नृत्यगोपाल दास तथा राजगोपाल मंदिर के महंत रहे स्व. कौशल किशोर शरण फलाहारी जी सहित अन्य विशिष्ट संतों एवं विद्वानों को प्रदान किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि क्रांतिकारी बृजनंदन ब्रह्मचारी का जन्म मूल रूप से सिद्धार्थनगर जनपद के डंडवाघाट में हुआ था। वह विद्याध्ययन के लिए अयोध्या आए और श्री तिवारी मंदिर में रहकर संस्कृत की शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1923 में अयोध्या में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की बैठक आयोजित कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वह महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के निकट सहयोगियों में रहे। वर्ष 1929 में वह दिल्ली सेंट्रल जेल में भी रहे।
बृजनंदन ब्रह्मचारी की स्मृति में प्रदान किए जाने वाले सम्मान से अब तक श्रीराम अवध अंध विद्यालय, दूरदर्शन लखनऊ के आत्म प्रकाश, गौरीशंकर गवैयाजी, डॉ. चैतन्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया जा चुका है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!