अयोध्याउत्तर प्रदेश

राम मंदिर में कथित घोटाले के आरोपों पर राजर्षि महंत एकनाथ महाराज की तीखी प्रतिक्रिया 

राम मंदिर में कथित घोटाले के आरोपों पर राजर्षि महंत एकनाथ महाराज की तीखी प्रतिक्रिया
अयोध्या धाम
तापसी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य के उत्तराधिकारी राजर्षि महंत एकनाथ महाराज ने राम मंदिर में कथित घोटाले के आरोपों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं के संरक्षक ही भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों में घिरने लगें तो यह केवल आर्थिक मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर भी चोट है।
राजर्षि महंत एकनाथ महाराज ने कहा कि धर्म और मंदिरों की रक्षा का कार्य सदियों से संत-महात्माओं और धर्माचार्यों ने किया है, लेकिन आज कुछ लोग भगवा वस्त्र धारण कर धर्म के नाम पर अपना कारोबार चला रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आस्था के नाम पर एकत्रित होने वाले धन का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आम हिंदू श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई भगवान को समर्पित करता है, लेकिन यदि वही धन कुछ लोगों की व्यक्तिगत संपत्ति, ऐशो-आराम और पीढ़ियों के वैभव का साधन बन जाए तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उनके अनुसार ऐसे लोगों को कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
राजर्षि महंत ने एक बड़ा सुझाव देते हुए कहा कि मंदिरों में भक्तों द्वारा समर्पित धन का उपयोग राष्ट्र और समाज के कल्याण में होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मंदिरों की आय का पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए तथा सभी छोटे-बड़े मंदिरों के पुजारियों को नियमित वेतन दिया जाए। उन्होंने कहा कि मंदिरों में आने वाला धन सरकार की निगरानी में जनकल्याणकारी योजनाओं, गरीबों के उत्थान, भूखों के भोजन और जरूरतमंदों की सहायता में लगाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी मंदिरों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें पुजारियों को निर्धारित मानदेय मिले और मंदिरों की आय का पारदर्शी उपयोग समाजहित में हो।
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि आज अनेक मठाधीश, पीठाधीश और धार्मिक पदों पर बैठे लोग आलीशान जीवनशैली और बड़े-बड़े काफिलों में दिखाई देते हैं। उनका कहना था कि समाज को यह समझना होगा कि आस्था का धन केवल प्रदर्शन और वैभव का माध्यम नहीं बनना चाहिए, बल्कि उसका उपयोग धर्म और समाज की सेवा के लिए होना चाहिए।
राम मंदिर से जुड़े आरोपों और हालिया चर्चाओं के बीच राजर्षि महंत एकनाथ महाराज का यह बयान धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई बहस को जन्म दे रहा है। फिलहाल आरोपों और दावों के बीच अफवाहों का बाजार गर्म है, लेकिन एक कहावत इन चर्चाओं के केंद्र में है—
“धुआं यूं ही नहीं उठता, कहीं न कहीं आग जरूर लगी होती है।”

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